302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. एस.पी. मुखर्जीः विश्व के किस भाग के संविधान में ऐसी प्रथक व्यवस्था है? पर आपने मेरा खंडन किया।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः पूरी बात यह है कि ब्रिटेन का संविधान एक अलिखित संविधान है और इसलिये वहाँ कुछ भी जरूरी नहीं वहाँ संसद सर्वोपरि है।
डॉ. एस.पी. मुखर्जीः अमरीका के संविधान की क्या स्थिति है?
माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः ब्रिटेन में कोई मूल अधिकार नहीं है। यही कठिनाई है।
डॉ. एस.पी. मुखर्जीः क्या किसी लिखित संविधान में ऐसी व्यवस्थ है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं है। परन्तु अमरीका में, उच्चतम न्यायालय द्वारा अपनाये गये निर्वचन के नियमों के अनुसार, ऐसा कानून सम्भव है।
डॉ. एस.पी. मुखर्जीः वह अलग बात है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह बिल्कुल अलग नहीं है।
अब मैं खंड 3 के उपखंड (1) (ख) पर आता हूँ। यह खंड अनुच्छेद 19 के
खंड (6) का, जो किसी व्यापार, व्यवस्था आदि के बारे में है, संशोधन करने के लिए लाया गया है।
श्री देशबन्धु गुप्ता (दिल्ली)ः इससे पहले कि माननीय मंत्री खंड 3(1) (ख) पर आएँ, मैं उनसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ। फ्मानहानि अथवा किसी अपराध के लिए उकसानाय् शब्द हैं और सभी वर्तमान सब कानून........
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकः मैं उस पर नहीं आया हूँ।
श्री देशबन्धु गुप्ताः मैं चाहता हूँ, आप उसका उत्तर दें।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं अभी उत्तर नहीं दूंगा। मैं इसका उत्तर बाद में दूंगा। मैंने इसे नोट कर लिया है और मेरे विचार से इस प्रश्न का उत्तर दिया जाना चाहिए। ऐसा न करने के लिए कोई आधार नहीं है। हो सकता है, सदन मेरा स्पष्टीकरण स्वीकार न करे, किन्तु ऐसी बात नहीं है कि मेरे पास इसका स्पष्टीकरण नहीं है।
जहां तक इस खंड का संबंध है, आप देखेंगे कि खंड (6) के बाद के भाग को दो भागों में पृथक किया गया है। एक भाग किसी व्यवसाय को करने की अर्हताओं से संबंधित है और दूसरा भाग किसी व्यापार आदि को वास्तविक रूप में चलाने के बारे में हैं। उस दूसरे भाग का महत्वपूर्ण भाग यह है कि यह राज्य को इस बात की अनुमति देता है कि वह किसी व्यापार करने वाले गैर-सरकारी लोगों और उसी व्यापार