303
को राज्य द्वारा किये जाने के बीच अलग-अलग वर्गीकरण करे। इस खंड और इसके पेश करने की आवश्यकता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस निर्णय के कारण उत्पन्न हुई है, जो 1951 ए.आई.आर. (इलाहाबाद) 257 पूर्ण पीठ में दिया हुआ है। और जो मोतीलाल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के नाम से जाना जाता है। माननीय सदस्यों को याद होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मोटर परिवहन के राष्ट्रीयकरण की एक योजना आरम्भ की थीं। वह सरकार इस योजना को छुटपुट तरीके से क्षेत्रवार कार्यान्वित कर रही थी। उसका कहना था कि जिस क्षेत्र में उनका एकाधिकार होगा, उस क्षेत्र में किसी गैर-सरकारी व्यक्ति को बसें चलाने का अधिकार नहीं होगा। कुछ क्षेत्रों के बारे में उन्होंने शुरू में सोचा था कि वे उन्हें संभाल लेंगे, कि बाद में वे उन्हें नहीं संभाल सके। इस कारण उन्होंने वे क्षेत्र गैर-सरकारी बस-स्वामियों के लिए भी छोड़ दिये। ऐसा करते समय उन्होंने कहा कि राज्य के लिए उन क्षेत्रों में जो उसने अपने लिए आरक्षित किए हैं, बसें चलाने के लिए लाइसेंस प्राप्त करना जरूरी नहीं होगा, परन्तु गैर-सरकारी स्वामियों को राज्य से लाइसेंस प्राप्त करना होगा। यह प्रश्न इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष इस आधार पर उठाया गया था कि यह भेदभाव है। मेरे विचार में, यदि राष्ट्रीयकरण वांछनीय है और देश के सर्वोत्तम हित में है, तो यह भी स्वीकार करना होगा कि हो सकता है राज्य के लिए समूचे देश में एक ही समय राष्ट्रीयकरण करना सम्भव न हो। इसमें प्रशासनिक और अन्य बहुत-सी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए योजना को पूरी तरह कार्यान्वित करने के लिए राज्य के लिए यह जरूरी होगा कि वह स्पष्ट रूप से बताये कि वह किस क्षेत्र में कार्य करेगी और कौन-सा क्षेत्र उसने दूसरों के लिए छोड़ा है।
इस प्रक्रिया में, भेदभाव न करने का सिद्धांत रुकावट नहीं बनना चाहिए। राष्ट्रीयकरण के मामले में भेदभाव न बरतने का सिद्धांत आड़े न आये, इस उद्देश्य से यह विशेष संशोधन लाया गया है और मैं नहीं समझता कि सदन इस पर कोई गम्भीर आपत्ति करेगी।
एक माननीय सदस्यः उच्च न्यायालय ने भी यही बात कही है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अब मैं खंड 3, उप-खंड (2) पर आता हूँ, जिसके बारे में.........
डॉ. एस.पी. मुखर्जीः आपने इस खंड से ‘युक्तियुक्त’ शब्द क्यों हटा दिया?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ‘युक्तियुक्त’ शब्द इसमें नहीं था। इस बात पर चर्चा हो सकती है। (एक माननीय सदस्यः प्रवर समिति में) सदन में, हर जगह।
अब, मैं खंड 3, उप-खंड (2) पर आता हूँ। यह समझने के लिए कि यह संशोधन वस्तुतः क्या करता है, हमें वापस अनुच्छेद 13 पर जाना होगा। केवल अनुच्छेद 13 के प्रकाश में ही हम इस विशेष उप-खंड 13 को स्पष्ट रूप से समझ सकेंगे। जैसा कि