305
पास निकट भविष्य में इन विधियों को पुनः अधिनियमित करने का समय होगा। मैं स्वयं भी ऐसा नहीं सोच सकता। हमारे पास यहां काफी विधायन कार्य है।
श्री सारगंधर दासः नई संसद क्यों नहीं कर सकती?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि नई संसद इस कार्य को करेगी तो इसका मतलब यह होगा कि वर्ष में छः, सात अथवा आठ महीनों तक सार्वजनिक व्यवस्था के लिए कोई कानून नहीं बन सकेगा, अपराध के लिए उकसाने के लिए और विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के बारे में कोई विधि नहीं होगी। यदि सदस्यगण इस निश्चित संभावना पर विचार कर सकते हैं तो वे करें, मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
चौ. रणबीर सिंह (पंजाब)ः यदि नई संसद चाहे तो इन कानूनों को निरसित कर सकती है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं अनुच्छेद 19 पर बोल चुका हूँ।
डॉ. एस.पी. मुखर्जीः आप भूतलक्षी प्रभाव क्यों दे रहे हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आप भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं करेंगे तो ये विधियां पुनर्जीवित नहीं हो पायेंगी।
श्री शिवचरण लाल (उत्तर प्रदेश)ः क्या यह कानूनी है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः क्यों नहीं? यदि इन कानूनों को लागू होना है तो ये उसी तारीख से लागू होंगी जब से यह कानून अस्तित्व में आया है। यदि आप इन कानूनों को पुनः अधिनियमित करते हैं तो आप इस पर नये सिरे से सोच सकते हैं। परन्तु मैं नहीं समझता कि आप इन्हें पुनः अधिनियमित कैसे कर सकते हैं।
श्री देशबन्धु गुप्ताः चूंकि माननीय विधि मंत्री अगले अनुच्छेद को ले रहे हैं, क्या मैं इस अनुच्छेद के बारे में एक प्रश्न पूछ सकता हूँ? जो शक्ति ल जा रही है क्या वह किसी अपराध के लिए उकसाने के बारे में है? प्रेस (आपात शक्तियां) अधिनियम की धारा 4, जिसका माननीय विधि मंत्री ने उल्लेख किया है, हत्या अथवा किसी अपराध के लिए जिसमें हिंसा अन्तर्गस्त हो, को उकसाने के संबंध में हैं? अतः मैं जानना चाहता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः क्या आप इसकी हिमायत करना चाहते हैं?
श्री देशबन्धु गुप्ताः नहीं। मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या उन विस्तृत शक्तियों के अन्तर्गत जिन्हें प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है, किसी ऐसे आदेश को, जो लोगों की स्वतंत्रता के विरुद्ध हो, अहिंसक रूप से पालन न करने की हिमायत की जा सकती है। भले ही वह किन्हीं अन्य कानूनों के अन्तर्गत अपराध हों। मैं स्पष्टीकरण