33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 323

308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मुझे ऐसा लगता है कि हम इस भूमि के प्रश्न के संबंध में मुआवजे और भेदभाव से संबंधित मौलिक अधिकारों के उक्त दो अनुच्छेदों को भी स्वीकार नहीं कर सकते।

मैंने इस विषय पर बहुत ध्यान दिया है। मैंने आयरलैंड की स्थिति का भी बड़े ध्यान से अध्ययन किया है। आयरलैंड हमारे देश से काफी मिलता है। आयलैंड में किसान भूमि के लिए तड़प रहे हैं। आयरलैंड में भूमि का बंटवारा बे-तरतीबी से किया गया है। कुछ के पास बहुत बड़ी सम्पदा है_ कुछ के पास बहुत कम है। बहुत से भूमिहीन हैं। आयरलैंड के संविधान ने क्या किया है? जो सदस्य भूमि संबंधी हितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उन्हें इस मामले पर तुलनात्मक दृष्टि से विचार करना चाहिए। आयरलैंड के संविधान में भूमि पर सम्पदा विशेष रूपेस मूल अधिकार नहीं है। आयरलैंड के संविधान के अनुच्छेद 43 के खंड 2 में यह कहा गया है कि भूमि पर अधिकार सामाजिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा विनियमित किया जाना चाहिए। इसमें यह नहीं कहा गया है, कि भूमि उसी सूरत में ली जायेगी जब उसका पूरा मुआवजा दे दिया जायेगा या भूस्वामियों के बीच कोई भेदभाव नहीं बरता जायेगा। आयरलैंड में क्या स्थिति है? वहां उन्होंने भीड़-भाड़ के इलाकों के लिए एक बोर्ड बना दिया है। यह एक पृथक संगठन है, जिसे कानून से बनाया है और इस बोर्ड को भूमि अर्जित करने, भू-जोतों के टुकड़े करने, भूमि को समतल बनाने तथा पड़ौसी स्वामी की भूमि लेकर अलाभकर जोतों को लाभकर जोतों में बदलने की शक्ति है और मुआवजा तय करने का अधिकार भी इसी बोर्ड को दिया गया है। इस बोर्ड के काम का निर्वचन करने के लिए कोई न्यायिक प्राधिकरण नहीं है।

एक माननीय सदस्यः और कोई अपील नहीं है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कोई अपील नहीं। कुछ लोगों ने अपील की है, किन्तु न्यायालयों का कहना है कि किसी भी न्यायालय में कोई अपील नहीं हो सकती।

अपने बारे में मैं निस्संकोच यह कह सकता हूँ कि जिन राज्यों की भूमि का अर्जन किया है, उने द्वारा प्रारूपित नई योजनाओं का मैं प्रशंसक नहीं हूँ। मेरे विचार में, इस देश में किसान स्वामी बनाना कोई अच्छी बात नहीं है। हमारे देश में दिक्कत यह है कि हमारे यहां आधा एकड़ या एक या दो एकड़ भूमि वाले छोटे किसान हैं, जिनके पास न तो पैसा है, न बैल हैं, न औजार हैं, न बीज हैं और न ही पानी की कोई व्यवस्था है। फिर भी वे भू स्वामी है और भूमि रखते है। भविष्य के बारे में मुझे बड़ी चिन्ता रहती है कि यदि यही कृषि-प्रणाली जारी रही तो इस देश का और इसके खाद्य उत्पादन का क्या होगा? मैं बहुत प्रसन्न होता, यदि राज्य इन सभी सम्पत्तियों का अर्जन कर लेता और भूमि को राज्य की भूमि के रूप में अपने पास रखता और कृषकों को स्थायी तौर पर बटाई पर देता ताकि राज्य को माल सप्लाई करके सामूहिक खेती और सहकारी खेती शुरू करने का अधिकार होता है। परन्तु इस समय हमारे देश में बड़ी संख्या में भूमिहीन