33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 325

310 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इतना क्रांतिकारी नहीं हूँ।

श्रीमती रेणुका रेः परन्तु आपने स्वयं ही सुझाव दिया है कि राज्य को भूमि का अर्जन करना चाहिए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, मैं धीरे-धीरे सुधार लाने के पक्ष में हूँ।

अब मैं अनुच्छेद 31 (ख) पर आता हूँ। यह अनुच्छेद नौवीं अनुसूची में कतिपय विधियों का उल्लेख करता है, जिन्हें पारित कर दिया गया है। इस संबंध में भारी आपत्ति की गई है कि यह एक बड़ा ही असामान्य तरीका है। पहली दृष्टि में तो यह निसंदेह एक असामान्य तरीका है। परन्तु हम इसे दूसरे दृष्टिकोण से देखते हैं। ये विधियां क्या हैं? वे कौन से सिद्धांत हैं जिनके आधार पर ये विधियां बनाई गई हैं, जिनकी रक्षा नौंवी अनुसूची द्वारा की जा रही है। ये सभी विधियां हैं जो अनुच्छेद 31 (क) के अन्तर्गत आती हैं, अर्थात् ये वही विधियां हैं, जिनका उद्देश्य सम्पदा अर्जित करना है। जब हम अनुच्छेद 31(क) के आधार पर यह कहते हैं कि जब कभी भी किसी सम्पदा के अर्जन के लिए कानून बनाया जाये, तो इसकी वैधता के आड़े न तो मुआवजे का सिद्धांत आना चाहिए और न ही भेदभाव का। मैं मानता हूँ कि भावुकता में बहकर इस संबंध में कुछ आपत्ति की जा सकती है। परन्तु व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हमें इन विधियों को वैध घोषित कर देना चाहिये।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः ये दोषपूर्ण विधियां हैं, इसीलिए इन्हें वैध घोषित करना उचित होगा।

श्री श्यामनन्दन सहाय (बिहार)ः मैं यह मानना चाहता हूँ कि जिन विधियों को वैध घोषित करने का प्रयत्न किया जा रहा है क्या उनके अन्तर्गत केवल भूमि सुधार आते हैं या वे सम्पत्ति अंतरण अधिनियम आदि जैसी अन्य विधियों में भी हस्तक्षेप करेंगी? क्या सरकार ने मामले के इस पहलू पर विचार किया है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इसके बारे में बिल्कुल स्पष्ट बात करना चाहूंगा। दूसरा तरीका यह होगा कि हम इन विधियों में संशोधन करने और उन्हें पुनः निर्मित करके अनुच्छेद 31 के उपबंधों के अनुरूप बनाने की शक्ति राष्ट्रपति को दे दें।

पं. ठाकुर दास भार्गवः अनुच्छेद 31 के अन्तर्गत हमने यह निर्णय लिया था कि यदि राष्ट्रपति कतिपय विधियों को प्रमाणित कर देते हैं, तो वे विधियां वैध होंगी। अब उस तरीके को समाप्त कर दिया गया है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह इसलिए नहीं किया गया कि इससे मेरे ऊपर अर्थात् विधि मंत्रालय पर और खाद्य और कृषि मंत्रालय पर तथा अन्य मंत्रालयों पर भारी बोझ पड़ेगा। हमें सभी को यहां बैठना होगा और इन अधिनियमों की प्रत्येक