33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 332

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चूँकि अधिकांश मामले प्रविष्टि सूची 1 में सूची 3 में आते हैं, इसलिए कुछ मामलों में संसद को कानून बनाने का अनन्य प्राधिकार है और कुछ मामलों में समवर्ती प्राधिकार है।

डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः क्या माननीय मंत्री इसे और अधिक स्पष्ट करेंगे? सार्वजनिक व्यवस्था के बारे में कानून पास करने की समवर्ती शक्ति कहां है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सार्वजनिक व्यवस्था के बारे में एक और प्रविष्टि है-सूची 3 की 39 जिसमें पुस्तकों और समाचार-पत्रों का उल्लेख है। समाचार-पत्रों का इससे बहुत अधिक संबंध है।

डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः माननीय मंत्री यह तर्क दे रहे हैं कि कुछ मामलों में, वास्तव में सभी मामलों के संबंध में, या तो संसद को समवर्ती क्षेत्राधिकार प्राप्त है अथवा अनन्य क्षेत्राधिकार प्राप्त है। मैं चाहूंगा कि वे इस स्थिति को विशेष रूप से स्पष्ट करें।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं आपको प्रविष्टियां बता रहा हूँ।

डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः सार्वजनिक व्यवस्था?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सार्वजनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा शीर्ष, सूची 2 की प्रविष्टि 1 है। समाचार-पत्र भी सार्वजनिक व्यवस्था के अंतर्गत आ सकते हैं।

डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः ऐसी बात नहीं है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः बात यह है कि प्रत्येक कानून को किसी न किसी प्रविष्टि से बद्ध करना होता है। कानून बनाने के लिए संसद के प्राधिकार अथवा राज्य के प्राधिकार के बारे में निर्णय कैसे लिया जाए?

डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः क्या माननीय मंत्री यह स्वीकार करेंगे कि समाचार-पत्रों को छोड़कर सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित कानून के संबंध में संसद को कोई समवर्ती क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है। हमें इस बात को स्पष्ट कर देना चाहिए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जी हाँ।

माननीय उपाध्यक्षः माननीय मंत्री ने यह नहीं कहा है कि प्रत्येक मद समवर्ती सूची में है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उनमें से अधिकांश संसद के अनन्य क्षेत्राधिकार में हैं और कुछ मामलों में क्षेत्राधिकार समवर्ती भी हैं। इसीलिए मेरा सदन से निवेदन है कि संसद को उन क्षेत्रों में जिनका यहां विधान के अनन्य अधिकार के रूप में उल्लेख किया गया है, कानून बनाने के लिए संसद को शक्ति देने हेतु कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। संसद को कतिपय मामलों में समवर्ती शक्ति भी प्राप्त है ताकि वह प्रान्तीय