318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विधानमण्डलों द्वारा उस शक्ति के दुरुपयोग को रोक सके, जो हम उन्हें सौंप रहे हैं।
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः समवर्ती सूची के अंतर्गत अपराध को उकसाने के बारे में क्या अधिकार हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह दण्ड संहिता के अंतर्गत आता है। अपराध के लिए उकसाना दण्ड संहिता में एक विशिष्ट अपराध है।
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः माननीय मंत्री को सदन को प्रविष्टि 1 पढ़कर सुनानी चाहिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं उन्हें बीच में बोलने का अवसर नहीं दे सकता क्योंकि उन्होंने भी माननीय गृहमंत्री को बीच में बोलने नहीं दिया था। यह कोई भाषण कक्ष नहीं है और न ही मैं छात्रों के समक्ष भाषण दे रहा हूँ। मैं अपनी बात कह रहा हूँ। यदि मेरे मित्र भाषण चाहते हैं तो हम कांस्टीट्युशन क्लब में मिल सकते हैं और मैं वहां उनको भाषण दे सकता हूँ।
माननीय उपाध्याक्षः मैं यही कह सकता हूँ कि माननीय सदस्य यह कहे रहे हैं कि सूची-2 राज्य सूची की प्रविष्टि 1 केवल सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित है और यह उसके अंतर्गत नहीं आती। अपराध उकसाना, दण्ड संहिता में है। यदि वह संतुष्ट नहीं है तो वह अपना अनुमान लगा सकते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आप ऐसा कह सकते हैं कि सार्वजनिक व्यवस्था इसके अंतर्गत नहीं आती।
माननीय उपाध्यक्षः माननीय मंत्री यह बताना चाहते हैं कि अधिकांश अपराध या तो संघीय सूची में आते हैं या समवर्ती सूची में। कभी-कभी कम संख्या, अधिक संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः माननीय मंत्री ने बताया कि अपराध उकसाना समवर्ती सूची की प्रविष्टि 1 के अन्तर्गत आता है। परन्तु वह मद इस प्रकार हैः
फ्दंड विधि, जिसमें वे सभी विषय सम्मिलित हैं जो संविधान के आरम्भ में भारतीय दण्ड संहिता में सम्मिलित थे परन्तु सूची 1 अथवा सूची 2 में उल्लिखित किसी विषय से सम्बद्ध विधियों के विरुद्ध अपराध सम्मिलित नहीं हैं और सिविल सत्ता की सहायता के लिए नौसेना, थल सेना अथवा वायु सेना या संघ के किसी सशस्त्र बल का प्रयोग सम्मिलित नहीं है।य्
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं उन्हें बीच में बोलने का अवसर नहीं दूंगा। मैं अपना भाषण एक बजे तक समाप्त करना चाहता हूँ........