33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 335

320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्रीमती दुर्गाबाईः कौन-सी प्रक्रिया के अधीन?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं जानता हूँ कि कुछ लोगों को सनक होती है। इन तीनों कारणों से, ये सभी संशोधन बिल्कुल अनावश्यक हैं।

मेरे मित्र पं. कुंजरु ने कुछ बातें उठाई हैं। मैं उनका उत्तर देना चाहता हूँ। जहां तक शब्दों को बदलने के संबंध में उनके संशोधन का संबंध है, मेरे विचार में उनके शब्द केवल काव्यात्मक अनुप्रास हैं, जिनमें कोई सार नहीं है। चाहे आप इसे मैत्रीपूर्ण संबंध कहें या किन्हीं अन्य शब्दों में बताएँ, सार और विधान का शीर्ष यथावत रहता है। इसलिए मैं उन पर अपना समय खर्च करने के लिए तैयार नहीं हूँ।

परन्तु उन्हें अमरीकी मामले से, अर्थात् नीयर बनाम मिनेसोटा से, जिसे वह कभी नहीं भूल सकते, बहुत लाभ हुआ है। यह सत्य है कि अमरीकी उच्चतम न्यायालय ने एक ऐसे कानून को रद्द कर दिया, जिसने पिछली रोक को सांविधानिक ठहराया था। परन्तु उस मामले में जो निर्णय दिया गया था उस पर हमें अपनी मोहर लगानी चाहिये, क्योंकि उस मामले से संबंधित कुछ घटनाओं की ओर मैं अपने माननीय मित्र का ध्यान दिलाना चाहूंगा। मेरे पास एक पुस्तक है और मैं उसका नाम भी बता दूंगा। मैं जानता हूँ कि डॉ. मुखर्जी ऐसे मामलों में बड़ी सावधानी बरतते हैं। वह पुस्तक है फ्फ्री स्पीच इन दी युनाइटेड स्टेट्सय्। ऐसी बहुत-सी अन्य पुस्तकें भी हैं, जिनके बारे में वे जानते होंगे। इस मामले में पहली बात जो अमरीकी लेखकों ने स्वयं नोट की, वह यह है कि यह फैसला केवल एक न्यायाधीश के बहुमत से लिया गया था, यानी पांच न्यायधीश इसके पक्ष में थे और चार विरुद्ध थे। दूसरी बात यह है कि पृष्ठ 380 पर लेखक ने स्वयं कहा है कि इस बहुत कम बहुमत के कारणµ

फ्नीयर मामले का कोई तत्काल प्रभाव नहीं हुआ, सिवाय इसके कि इसने मिनेसोटा की मूर्ति को, जो कहा जाता है कि एक घृणित स्थानीय स्थिति के कारण अस्तित्व में आई थी, अवैध ठहरा दिया।

मैं उनके लिए अहसमति प्रकट करने वाले न्यायधीशों के प्रमुख द्वारा दिये गये फैसले का एक अंश पढ़कर सुनाना चाहूंगा, जो मेरे विचार में उद्धृत करने योग्य है। मिस्टर जस्टिस बटलर ने जो अल्पमत के प्रमुख थे कहा थाः फ्यह सर्वविदित है कि इस मामले में जो कार्यवाही और प्रकाशन दिखाये गये हैं, उनके परिणामस्वरूप जो बुराइयां पैदा हुई हैं, उन्हें प्रभावपूर्ण ढंग से दबाने के लिए वर्तमान अपमान-लेख संबंधी विधियां अपर्याप्त है। इस मत के कारण कि हमारे सामने जो विधि है, उस जैसी विधियां अवैध हैं और उन पर पहले रोक लगा दी गई हैं.... प्रत्येक समुदाय की शक्ति और व्यवस्था तथा प्रत्येक व्यक्ति के कारोबार और निजी मामलों को ऐसे किसी गुस्ताख प्रकाशक के निरन्तर और दीर्घ-काल तक चलने वाले झूठे और विद्वेषपूर्ण आक्रमणों का शिकार होना