322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पं. कुंजरु से यह जानना चाहता हूँ कि क्या वे चाहेंगे कि राज्य इस प्रकार के बहिष्कार को अपराध माने या नहीं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः इस संबंध में डाक्टरों की राय अलग-अलग है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं एक और उदाहरण देता हूँ जिसकी खबर हाल ही में छपी थी। थाणा के नजदीक एक जगह किसी एक कुएँ में पानी लेने को लेकर सवर्ण हिन्दुओं और अनुसूचित जातियों के बीच मनमुटाव हो गया। पुलिस की सहायता से अनुसूचित जातियां सवर्ण हिन्दुओं के साथ उस कुएँ से पानी लेने का अपना अधिकार प्राप्त कर सकीं। सवर्ण हिन्दुओं को यह बात पसन्द नहीं आई। वे स्वयं ही उस कुएं का प्रयोग करना चाहते थे। दो दिन पहले बम्बई प्रैस में एक खबर छपी कि सवर्ण हिन्दुओं ने उस कुएं में कोई जहरीला पदार्थ गिराने के लिए अपने कुछ लोगों को अवसर दिया। परिणाम यह हुआ कि सारा पानी विषाक्त हो गया और अनुसूचित जातियों के कुछ लोगों ने उस कुएं का पानी पिया और वे जहर के प्रभाव के कारण बीमार पड़ गये। मैं अपने दोनों मित्रों से पूछना चाहूंगा कि क्या वे हिंसा के लिए उकसाने की अपनी परिभाषा को सीमित करेंगे या वे उस मामले में भी इसे लागू करेंगे जहां एक समुदाय किसी दूसरे समुदाय को नुकसान पहुंचाने या चोट करने के लिए कोई काम करता है।
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः ऐसे मामले में इसे रोकने के लिए मैं और आप वहां जायेंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आप और मैं हर जगह नहीं जा सकते। आप चुनाव लड़ने में लगे होंगे और मैं कुछ और कर रहा होऊंगा। और उन लोगों की सहायता के लिए पहुंचने के लिए हमारे पास समय नहीं होगा। अपने कंधों पर जिम्मेदारी लेने से बात नहीं बनेगी। इसके लिए कानूनी व्यवस्था करना कहीं बेहतर होगा।
विशेष कानूनों के लिए मैं और मेरे सहयोगी अर्थात् मंत्रिगण बार-बार कह रहे हैं कि इस विधेयक में हम संसद को किसी उद्देश्यों के लिए कानून बनाने की शक्ति दे रहे हैं। हम वर्तमान कानूनों की भी हिमायत नहीं कर रहे हैं। परन्तु कुछ सदस्य अपनी जिद के कारण विरोध करने पर तुले हैं, वे कानून बनाने की शक्ति रखने और कोई विशेष कानून बनाने के बीच अन्तर नहीं कर सकते।
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जीः जिद आपको है, बात नहीं समझने की।
तत्पश्चात् सदन मध्याह्नोपरांत
साढ़े तीन बजे तक के लिए स्थगित हो गया।