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सभा मध्याह्नोपरांत साढ़े तीन बजे पुनः एकत्रित हुई।
(पं. ठाकुर दास भार्गव पीठासीन हुए)
ऽश्री हुसेन इमामः मैं सदन का ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहता हूँ कि कोई भी जमींदार अपने होशोहवास में संविधान अथवा माननीय प्रधानमंत्री के कथन पर आपत्ति नहीं कर सकता। सारा झगड़ा इस बात पर है कि क्या हम संविधान का आशय पूर्ण कर रहे हैं या किसी ऐसे संविधान के नाम पर जो संविधान अधिनियम में वर्णित संविधान की परिभाषा में नहीं आता, कोई चीज हम पर थोपी जा रही है। और दूसरे........
एक माननीय सदस्यः हम संविधान का संशोधन कर रहे हैं।
श्री हुसेन इमामः नहीं, प्रधानमंत्री के अनुसार हम संविधान के आशय को पूरा कर रहे हैं। और इसमें मैं उनके साथ हूँ। संविधान सभा का सदस्य होने के नाते मैं भी उसमें शामिल था, यद्यपि मैं उस दिन उपस्थित नहीं था। इस संविधान के दो आधारभूत सिद्धांत थेµपहला उन अधिनियमों के बारे में था जो संविधान के लागू होने के बाद पास किये गये थे और दूसरा उन अधिनियमों के बारे में था जो संविधान के लागू होने से 18 महीने पहले पास किये गये थे। अब मैं आप से, सभी से और विधि मंत्री से यह प्रमाणित करने के लिए कहता हूँ कि इन दोनों श्रेणियों के अन्तर्गत ग्यारह अधिनियम आते हैं। ऐसे केवल चार ही अधिनियम हैं, जो संविधान के बाद पारित हुए और जिन्हें राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हुई। सात अधिनियम इस श्रेणी में नहीं आते।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचार में उन्हें राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हो चुकी है।
श्री हुसेन इमामः नहीं सिर्फ चार को प्राप्त हुई है। वे हैंµबिहार अधिनियम, उत्तर प्रदेश अधिनियम, मध्यप्रदेश अधिनियम और एक और अधिनियम। बाकी को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त नहीं हुई है।
श्री भारती (मद्रास)ः मद्रास अधिनियम को भी अनुमति मिल गई है।
श्री हुसेन इमामः 1950 के मद्रास अधिनियम-1 को अनुमति मिली है, 1948 के अधिनियम को नहीं। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि शुरू में मैं इस विषय पर बोला था और मैंने यह सुझाव दिया था कि इनकी पूरी तरह जांच करने के लिए सभी को और प्रवर समिति को पूरा समय दिया जाना चाहिए।
दूसरी बात जिसकी ओर मैं सदन का ध्यान दिलाना चाहूंगा, वह प्रधान मंत्री का यह
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 1 जून, 1951, पृष्ठ 9906-07