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शामिल करते हैं। परन्तु रियोबाड़ी सम्पदा को शामिल नहीं करते अर्थात् वह सम्पदा जो उनके पास है और जिस पर उनका पूरा अधिकार है और उनके और राज्य के बीच कोई बिचौलिया नहीं है। यह सच है कि कुछ राज्य ऐसे हैं जहां ‘सम्पदा’ शब्द की परिभाषा विस्तृत है और उसमें रियोबाड़ी के अन्तर्गत भूस्वामी या बम्बई भूराजस्व संहिता के अधीन भूमि धारण करने वाले या भारत के अन्य भागों के रय्यत भी शामिल हो सकते हैं। एक बार तो मैंने सोचा था कि एक व्याख्या जोड़कर ‘सम्पदा’ शब्द को सीमिति करने वाला प्रभाव दिया जा सकता है, परन्तु आगे और सोचने पर मैंने पाया कि कोई ऐसी व्याख्या देना जिससे बात पूरी हो जाये लगभग असम्भव है। फिर भी मैं यह कहना चाहता हूँ कि सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है कि अनुच्छेद 31-क में दिये गये उपबंधों का प्रयोग काश्तकारों को भूमि से अलग करने के लिए किया जाए।
श्री हुसेन इमामः चाहे वे कितने ही बड़े हों?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह एक अलग बात है। हम बिचौलयों और रैयतवाड़ी भूस्वामियों कके बीच अन्तर कर रहे हैं।
अब सरकार का निश्चित ही यह इरादा नहीं है। मैं मानता हूँ कि जो मित्र इस मामले में रुचि ले रहे हैं, वे सरकार के आशय की अभिव्यक्ति से संतुष्ट नहीं होंगे परन्तु इस विधेयक में अब आशय के अतिरिक्त कुछ और भी है। यदि मेरे मित्र चौधरी रणबीस सिंह अनुच्छेद 31-क के उपबंध को देखेंगे, जिसमें कहा गया है कि ऐसा प्रत्येक विधेयक राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित होगा, तो वह पायेंगे कि इसमें एक तरह का बचाव है और मैं आशा करता हूँ कि प्रधान मंत्री इस वादविवाद के उत्तर में दिये जाने वाले अपने भाषण में भी यह स्पष्ट करेंगे कि सरकार का कोई ऐसा इरादा नहीं है। और मेरा विश्वास है कि जब कभी भी ऐसा विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष विचार के लिए आएगा तो इस सदन में दिया गया वचन राष्ट्रपति पर भी विधेयक पर मंजूरी देने के मामले में बाध्यकारी होगा। इसलिए हममें किसी प्रकार के डर की कोई गुंजाइश नहीं है और मेरे किसी प्रचार के लिए भी कोई औचित्य नहीं है जो कुछ लोग कहना चाहेंगे कि यह विधेयक सरकार को ऐसी शक्ति दे देगा कि वह रैयतवाड़ी काश्तकारों समेत सभी को बेदखल कर देगी। मेरे विचार में इससे चौधरी रणबीर सिंह की संतुष्टि हो जायेगी।
श्री आर.के. चौधरी (असम)ः श्रीमती दुर्गाबाई ने?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचार में पहले श्री या श्रीमती आदि शब्द लगाना बहुत जरूरी नहीं है। मुझे बड़ी परेशानी होती है जब कोई मुझे श्री कहता है। श्री का अर्थ है धन और मेरे पास वह बिल्कुल भी नहीं है।
श्री आर.के. चौधरीः क्या मैं बता दूं कि मेरे मित्र डॉ. अम्बेडकर ने काफी शरारत कर दी थी, जब उन्होंने मुझे मेरे छोटे नाम से पुकारा था।