33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 341

326 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने सोचा कि आप इस बात से सहमत होंगे कि उससे आपका लिंग-परिवर्तन तो नहीं हुआ?

श्री आर.के. चौधरीः पर इससे सदन के कुछ लोगों में ईर्ष्या पैदा हो गई है।

श्रीमती दुर्गाबाईः कम से कम मेरे दिमाग में तो नहीं हुई।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उसके बारे में मद्रास अधिनियम में धारा 45 है। वह धारा 45 उन सम्पदाओं के संबंध में है, जिनका बंटवारा नहीं हो सकता। वह साधारण सम्पदाओं के संबंध में नही है और वह उपबंध यह है कि मुजावजा दिये जाने और किस प्रकार दिये जाने का निर्णय अधिकरण करेगा। इस विधेयक से उस अधिकरण की शक्ति में कोई बढ़ोतरी नहीं होती और उस विशेष अधिनियम के लिए अधिकरण को दी गई किसी शक्ति को वापस भी नहीं लिया जा रहा है। मेरे विचार में उस सीमा में बाकी चीज़ें वही होंगी, जो मद्रास अधिनियम से निर्धारित की हैं।

डॉ. देशमुखः क्या मैं माननीय विधि मंत्री से एक स्पष्टीकरण पूछ सकता हूँ? माननीय डाक्टर ने हमें बताया है कि रैयतवाड़ी काश्तकारों को भूमि से अलग करने या उन पर कोई पाबन्दी लगाने का कोई इरादा नहीं है। अनुसूची में बम्बई के छह अधिनियम हैं। यदि इनमें से किसी अधिनियम द्वारा रैयतवाड़ी काश्तकारों पर कोई सीमा निर्धारित कर दी जाती है, तो उन्हें अनुसूची में शामिल करना कहां तक उचित होगा और रैयतवाड़ी किसानों को इस संशोधन अधिनियम के अन्तर्गत न लाने के सरकार के इरादे पर इसका क्या प्रभाव होगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे इन अधिनियमों की भी कुछ जानकारी है। मैं बम्बई से आता हूँ और मैंने वहां के उच्च न्यायालय में वकालत की है। मैंने वहां इनके बारे में बहुत से मुकदमे लड़े हैं। इसलिए मुझे इसमें कोई सन्देह नहीं है कि

खोटी उन्मूलन और अन्य अधिनियम जिनका मेरे माननीय मित्र ने उल्लेख किया है, केवल बिचौलियों के संबंध में हैं।

श्री जवाहरलाल नेहरूः मेरे सहयोगी विधि मंत्री ने उठाई गई बहुत-सी बातों का उत्तर दे दिया है।

ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः चर्चा सुनने के बाद ऐसा लगता है कि सभी चाहते हैं कि राष्ट्रपति की अपनी अनुमति देने की शक्ति जारी रहनी चाहिये और यह पास किए गए कानूनों को संविधान के उपबंधों के अनुरूप ढालने का एक बड़ा उपयोगी उपकरण है। इसमें मुझे कोई मतभेद नजर नहीं आता। जो प्रश्न उठाया गया है वह यह हैः राष्ट्रपति संविधान पास होने की तारीख से लेकर अब तक उन कानूनों में मतभेद नहीं कर सके, जो संविधान के उपबंधों के असंगत पाये गये हैं और

ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 2 जून, 1951, पृष्ठ 1007-13