33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 342

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इसके लिए समय क्यों आवश्यक है? यही एक ऐसा प्रश्न लगता है जिस पर स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता है।

यह कहा गया है कि विधि विभाग बहुत ढीला है। कुछ मित्रों ने कहा है कि यह सो गया है।

बाबू रामनारायण सिंह (बिहार)ः यह बात ठीक है।

श्री हुसेन इमाम (बिहार)ः वह ऊँघ रहे हैं।

माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः मैं नहीं जानता कि ये बातें कोरी कल्पना हैं या इनमें कुछ सचाई भी है। मेरे विचार में सभी माननीय सदस्य इस बात से सहमत होंगे कि विधि विभाग भारत सरकार में सबसे छोटा विभाग है।

बाबू रामनारायण सिंहः क्यों?

श्री टी. हुसैन (बिहार)ः संसदीय कार्य विभाग भी है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः संसदीय कार्य विभाग का विधि मंत्रालय से कोई लेना-देना नहीं है_ वह उससे बिल्कुल अलग है।

मैं यह कहना चाहता हूँ कि विधि मंत्रालय में केवल तीन प्रारूपकार (ड्राफटसमैन) हैं। मैंने वित्त मंत्रालय से इनकी संख्या बढ़ाने के लिए आग्रह किया है परन्तु मेरा अनुरोध माना नहीं गया है।

श्री कॉमथः एक उपमंत्री है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उपमंत्री इसमें कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि कोई मंत्री प्रारूप तैयार नहीं कर सकता।

सदन को यह भी याद होगा कि जब से संविधान बना है, तब से कितना विधायन कार्य उसके समक्ष लाया गया है। मैं अपनी स्मरण-शक्ति से बता रहा हूँ कि प्रत्येक सत्र में 30 या 40 विधेयक पेश किये जाते हैं। कुछ पास हो जाते हैं और कुछ रह जाते हैं। जो रह जाते हैं उनमें से कुछेक को अध्यादेशों में परिवर्तन कर दिया जाता है। और सदन फिर इन अध्यादेशों को विधियों में परिवर्तित करता है। क्या केवल तीन प्रारूपकारों के लिए हर सत्र के लिए 40 या 50 विधेयक तैयार करना सम्भव है? इसके अलावा उन्हें और काम भी देखना होता है। इसलिए सभी को इस पर विचार करना चाहिए।

श्री पी.वाई. देशपांडे (मध्य प्रदेश)ः इसके लिए जिम्मेदार कौन है कि वहां केवल तीन ही प्रारूपकार हैं?