33. संविधान (प्रथम संशोधन) विधेयक - Page 346

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किया जाता है। जब ऐसी प्रस्तावित विधि आती है तो यह पता लगाने का कार्य प्रारूपकारों पर छोड़ दिया जाता है कि विधि संगत है अथवा नहीं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः प्रारूपकार भी अपनी भूमिका निभाता है। परन्तु विधि मंत्रालय और मंत्रिमंडल उसकी जिम्मेदारी लेता है।

श्री हुसेन इमामः क्या मैं जान सकता हूँ कि उन अधिनियमों की क्या स्थिति है, जो अनुसूची में हैं? क्या उन्हें अनुकूलित कर लिया गया है या किया जा रहा है? उदाहरणार्थ, बम्बई अधिनियम सं. 67 में पंजाब भूमि अन्यसंक्रामण अधिनियम की तरह, जिसे विधिविरुद्ध घोषित कर दिया गया है कुछ शर्तें हैं। कया सरकार इस अधिनियम में भी संशोधन करने का विचार रखती है? यह नौंवीं अनुसूची में मद 2 है। बम्बई अभिधृति और कृषि भूमि अधिनियम, 1948, जमींदारी उन्मूलन से संबंधित नहीं है, परन्तु उसमें यह कहा गया है कि कुछ लोगों के बीच अंतरण नहीं होगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सदन का उत्तर यह है कि इन अधिनियमों को अनुकूलन की प्रक्रिया से गुजारे बिना ही संविधान द्वारा विधिमान्य कर दिया जायेगा। मुझे तो हर हालत में सदन का फैसला मंजूर है। यह मुद्दा कल उठाया जाना चाहिये था।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैंने यह मुद्दा कल उठाया था, परन्तु आपने स्वीकार नहीं किया।

श्री राजागोपालाचारीः आगे के प्रश्नों को प्रश्न करने के कार्यक्रम तक स्थागित किया जा सकता है। वर्तमान खंड को स्वीकार कर लेना चाहिए।

माननीय उपाध्यक्षः हमने काफी चर्चा कर ली है।

प्रश्न यह हैः

फ्कि खंड 12 विधेयक का अंग बन गया है।य्

सदन में मतविभाजन हुआः पक्ष में 232, विपक्ष में 9

ऽप्रो. एस.एल. सक्सेनाः मुझे इसका बड़ा दुख है कि हमारे संविधान में यह संशोधन किया जा रहा है। जब हमने अपना संविधान बनाया था तो हमने इस बात की पूरी सावधानी बरती थी कि हमारी न्यायपालिका पर कोई सन्देह न हो और वह स्वतंत्र हो तथा संविधान की सर्वोत्तम व्याख्या कर सके। फिर भी कुछ दिन पहले हमारे विधि मंत्री ने उच्चतम न्यायालय पर यह आरोप लगाया है कि उसमें एक उपबंध के उद्देश्य की गलत व्याख्या की गई है। प्रधानमंत्री भी यह कह रहे थे कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के

ऽसं. वा., खंड-12, भाग-2, 2 जून, 1951, पृष्ठ 10020-21