332 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
न्यायधीशों के निर्वचन से संविधान निर्माताओं की मंशा स्पष्ट नहीं हुई है। मेरे विचार में यह अनुचित आलोचना है, यदि उच्चतम न्यायालय के न्यायधीश, जिन्होंने यह फैसला दिया है, विदेशी होते तो कुछ सन्देह की गुंजाइश थी क्योंकि वे देशभक्त नहीं हैं और इसलिए हमारे कानूनों की सही व्याख्या नहीं कर सकते। परन्तु मैं स्वयं महसूस करता हूँ कि यदि आप......
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे मित्र के ऐसे सुझाव का मैं खंडन करता हूँ। हम न्यायधीशों पर कोई लांछन नहीं लगाते।
प्रो. एस.एल. सक्सेनाः मुझे खुशी है कि उन्होंने यह बात आज कही है। मेरे मित्र प्रो. शाह ने जो कारण बताये हैं कि हमें चार आदमियों के लिए अपना संविधान नहीं बदलना चाहिए, उनके अलावा, मैं सिद्धांतः भी यह सोचता हूँ कि मुख्य न्यायाधिपति के स्थान पर बैठा एक विदेशी भी ऐसा फैसला सुनाने का साहस नहीं कर सकता, जिसमें संदेह की कोई गुंजाइश न हो। विधि मंत्री ने कहा कि किसी ने भी न्यायाधीशों पर लांछन नहीं लगाया। मैंने प्रधानमंत्री के भाषण को ध्यानपूर्वक पढ़ा है.........
माननीय अध्यक्षः क्या मैं माननीय सदस्य को याद दिला सकता हूँ कि इस समय यह मुद्दा नहीं है कि विधि मंत्री ने या प्रधानमंत्री ने किसी अन्य संदर्भ में क्या कहा? हम इस खंड पर विचार कर रहे हैं ओर उनके वे विचार इस ख्ांड से संगत नहीं हैं। केवल एक ही बात संगत है कि क्या इस खंड को स्वीकार किया जाये। मैं माननीय सदस्य से अनुरोध करूंगा कि वे अपनी टिप्पणियां इसी प्रश्न तक सीमित रखें?
ऽश्री राजागोपालचारीः माननीय सदस्य यह जानना चाहते हैं कि वह कौन-सी पाबन्दी है जिसे हम हटाने की कोशिश कर रहे हैं। अनुच्छेद 217 में यह पाबन्दी है कि कोई ऐसा व्यक्ति जो नागरिक नहीं है, न्यायाधीश नहीं हो सकता। सभी न्यायाधीश उस उपबंध के अन्तर्गत आ जायेंगे। उसे एक अस्थायी उपबंध द्वारा हटाने की कोशिश की जा रही है।
माननीय अध्यक्षः यदि कोई व्यक्ति उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नहीं हो सकता, तो वह मुख्य न्यायधिपति कैसे हो सकता है?
श्री शिवचरण लालः स्थानांतरण अनुच्छेद 22-क के अंतर्गत आता है। इसलिए स्थानांतरण के लिए यह आवश्यक नहीं है कि न्यायधीश नागरिक हो और इसीलिए इस संशोधन की आवश्यकता नहीं हैं।
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 2 जून, 1951, पृष्ठ 10024