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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, यदि सदन इससे संतुष्ट हो, तो मैं खंड 13 में एक संशोधन का प्रस्ताव करना चाहूंगा जो इस प्रकार होगाः
पृष्ठ 4, पंक्ति 8 और 9 में, फ्अथवा उच्चतम न्यायालय का।य्
श्री कॉमथः वह मेरे उन दो संशोधनों में से एक है, जो मैंने पेश किये हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि आप चाहें तो मैं आपका संशोधन स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ। यदि सदन फ्अथवा उच्चतम न्यायालय काय् शब्दों को हटाने से संतुष्ट हो जाये तो मैं नहीं समझता कि मुझे इस बारे में और उत्तर देने की आवश्यकता है।
माननीय अध्यक्षः मैं अब संशोधनों को सभा के मतदान के लिए रखूंगा। (प्रो. शाह का संशोधन अस्वीकृत हुआ।)
ऽमाननीय अध्यक्षः अगला संशोधन फ्अथवा उच्चतम न्यायालय काय् शब्दों को हटाये जाने के बारे में है। यह वही संशोधन है जिसका प्रस्ताव डॉ. अम्बेडकर ने किया है।
श्री जवाहरलाल नेहरूः यह बिल्कुल वही है।
श्री कॉमथः परन्तु मैंने इसे प्रस्तुत कर दिया है और प्रो. शाह ने भी प्रस्तुत कर दिया है।
माननीय अध्यक्षः संशोधन मौजूद है और मुझे इसे सदन के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
एक माननीय सदस्यः इसे वापस लिया जा सकता है।
प्रो. के.टी. शाहः मैं वापस क्यों लूँ?
माननीय अध्यक्षः प्रश्न यह हैः
फ्पृष्ठ 4, पंक्ति 8 और 9, में फ्अथवा उच्चतम न्यायालय काय् शब्दों को हटाया जाये।य्
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न यह हैः
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 2 जून, 1951, पृष्ठ 10024