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पेश किए जायें, उन पर विचार किया जाये और उसके बाद प्रस्ताव में संशोधनों के सुझाव देना सम्भव हो सकेगा। यही एक तरीका होगा। माननीय विधि मंत्री कृपया उस पर विचार कर सकते हैं। मेरा मतलब है संशोधन जहां तक और अन्य बातों का संबंध है, न कि सारतत्व के संशोधन।
ऽनिर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश, 1951 के बारे में प्रस्तावµजारी
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं चाहूंगा कि असम आदेश पर पहले विचार किया जाये।
माननीय उपाध्यक्षः हाँ। इस पर बहुत से संशोधन प्रस्तुत किये गये हैं। सुविधा के लिए, क्या यह पता लगाना सम्भव नहीं है कि माननीय विधि मंत्री कौन से संशोधन स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उस स्थिति में अन्य संशोधनों के लिए आग्रह करने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी यदि कुछ सदस्य अपने संशोधनों के लिए आग्रह करेंगे तो, हम उन पर विचार कर सकते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः असम के बारे में मेरे पास बहुत-से संशोधन हैं।
माननीय अध्यक्षः इसलिए यदि माननीय मंत्री अपने संशोधन पहले पेश करते हैं तो जो बातें रह जायेंगी उन पर हम वाद में विचार कर सकते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे संशोधन अनुपूरक सूची 4 में, 1 से 8 तक है। वे मात्र तकनीकी संशोधन हैं और उनमें असली महत्व की कोई बात नहीं है। आगे विचार करने के बाद मैं अपने संख्या 1 और 2 के संशोधनों को वापस लेना चाहता हूँ।
संशोधन, सदन की अनुमति से वापस लिए गये
ऽऽश्री चालिहाः मैं भी अनुपूरक सूची संख्या-2 में अपने प्रस्ताव संख्या 2 के लिए आग्रह करना चाहूंगा। मैं संख्या 1 के लिए आग्रह नहीं करता।
संविधान में यह उपबंध है कि शिलांग निर्वाचन-क्षेत्र एक सामान्य निर्वाचन-क्षेत्र के रूप में उपलब्ध रहेगा। अनुच्छेद 332 (6) में कहा गया हैµ
फ्कोई भी व्यक्ति जो असम राज्य की किसी अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, उस निर्वाचन-क्षेत्र को छोड़कर जिसके अन्तर्गत शिलांग की छावनी और नगरपालिका आते हैं। उस जिले के किसी अन्य निवार्चन-क्षेत्र से राज्य की विधानसभा में निर्वाचन के लिए पात्र नहीं होगा।य्
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 8 जून, 1951, पृष्ठ 10500
ऽऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 8 जून, 1951, पृष्ठ 10503