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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे मित्र ने जो प्रस्ताव पेश किया है, उसके बारे में मैं एक बात कहना चाहूंगा कि जिस निर्वाचन-क्षेत्र को बनाने की वह बात कर रहे हैं, उसमें निर्वाचकों की संख्या 4, 43, 524 होगी, जबकि अधिकतम सीमा, 3, 87, 929 है। यह आपत्ति उनके प्रस्ताव के लिए घातक है।
श्री पी.जी सेनः परन्तु यह बहु-सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अतः मैं श्री पी.जी. सेन के प्रस्ताव को (अनुपूरक सूची संख्या 2 में संख्या 2-बिहार आदेश) सदन के मतदान के लिए रखना चाहता हूँ। प्रश्न यह हैः (प्रस्ताव के पाठ के लिए, देखिये परिशिष्ट 33, उपाबंध 1 में छपा संशोधन संख्या 1, क्रम संख्या 2)
प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अनुपूरक सूची संख्या 6 में_ संशोधन संख्या 3, भाग 3, अर्थात् श्री जाजवेर के संशोधन द्वारा संशोधित श्री एस.एन. दास का संशोधन।
ऽऽमाननीय अध्यक्षः अब मैं सदन से चाहूंगा कि प्रत्येक प्रांत से संबंधित प्रस्तावों के अन्त में वह एक प्रस्ताव पारित करे कि उस विशेष राज्य से संबंधित आदेश के बारे में पारिणामिक संशोधन अध्यक्ष के निदेशानुसार किये जा सकते हैं ताकि प्रारूपकार और विभाग उन पर विचार करें और उन्हें ठीक कर दें। संशोधन आनुषंगिक होंगे और वे आमूल परिवर्तन करने वाले नहीं होंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस प्रयोजन के लिए मैं एक अलग संशोधन पेश करूंगा, जिसमें आपको यह शक्ति दी जाये कि आप प्रारूपकार को, अपने परामर्श से कतिपय परिणामिक संशोधन करने की अनुमति दे सकें।
माननीय अध्यक्षः हम इसे, आदेशों के अन्त में एक व्यापक प्रस्ताव द्वारा करेंगे।
जहां तक अन्य प्रस्तावों का संबंध है, मैं समझता हूँ कि जिन माननीय सदस्यों ने उन्हें पेश किया है वे उन्हें सदन की अनुमति से वापस ले सकेंगे।
संशोधन, सदन की अनुमति से, वापस लिये गये।
बम्बई आदेश
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मैं निम्नलिखित संशोधन स्वीकार करने के लिए तैयार हूँः
ऽऽसं. वा., खंड 13, भाग II, 9 जून, 1951, पृष्ठ 10528-32