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श्री कुम्भारः कागल ताल्लुक को छोड़कर एक और भी है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन् वे ऐसे परिवर्तन हैं, जो प्रारूपकार स्वयं आपके आदेशानुसार कर सकता है।
माननीय अध्यक्षः यदि वे आनुषंगिक संशोधन हैं और हम उनके सार को स्वीकार करते हैं, तो वे संशोधन कर दिये जायेंगे।
श्री भट्टः उठ खड़े हुए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मैं मानता हूँ कि मेरे मित्र फ्सांता क्रुजय् आदि का जिक्र करना चाहते हैं। मैंने उन्हें बता दिया है कि ये संशोधन आपके आदेशानुसार प्रारूपकार द्वारा उस संकल्प के अधीन कर दिये जायेंगे, जो मैं अंत में पेश करूंगा।
माननीय अध्यक्षः जहां तक सांताक्रुज को या किसी सड़क का उल्लेख करने या कागल को शामिल करने या न करने का संबंध है, माननीय सदस्यों को अपने सभी प्रस्ताव प्रारूपकार को देने चाहिये और उसके बारे में चर्चा करनी चाहिये। वह उन पर विचार करेगा और यदि आवश्यक हुआ, तो मैं उस पर आदेश जारी कर दूंगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यही अनुरोध मैं करने वाला हूँ।
श्री भट्टः मैं भी यही पूछना चाहता था कि क्या नामों में परिवर्तन आपके आदेश से किये जायेंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जैसा मैंने कहा, मैं एक प्रस्ताव पेश करने वाला हूँ। उस प्रस्ताव का आशय यह होगा कि आप प्रारूपकार को मात्र औपचारिक स्वरूप के कुछ परिवर्तन करने के आदेश दे सकेंगे। जब सभा उस प्रस्ताव को पास कर देगी, तो अध्यक्ष को आवश्यक कार्यवाही करने का अधिकार होगा।
माननीय अध्यक्षः यह कठिनाई इसलिए पैदा होती है कि कुछ सदस्य समय-समय पर अनुपस्थित रहते हैं और इसलिए उन्हें पूरी बात का पता नहीं चलता। क्या कोई और सदस्य भी कोई और संशोधन पेश करना चाहता है।
श्री हिरे (बम्बई)ः हां, श्रीमन्।
माननीय अध्यक्षः उनके अलावा जिन्हें विधि मंत्री स्वीकार कर रहे हैं?
श्री हिरेः हां।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः डाँग के संबंध में निर्णय लेने के कारण हुआ यह है कि एक और सीट महाराष्ट्र को मिल गई है। और वह सीट आदिवासियों के लिए