22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
12.00 बजे दोपहर
प्रिवी कौंसिल में अपीलें दो तरीकों से जाती हैं। वे सिविल प्रक्रिया संहिता के उपबंधों अर्थात् धाराओं 109 और 110 के अधीन, जिन्हें मंजूरी द्वारा अपील कहा जाता है, जाती हैं या वे ऐसी अपीलें होती हैं जहाँ पक्षकार को अपील करने का अधिकार होता है। इसके अलावा, प्रिवी कौंसिल को अपील करने की विशेष इजाज़त देने का अधिकार भी है और जब किसी पक्षकार को अपील करने की विशेष इजाज़त मिल जाती है, तो ऐसी अपीलें भी प्रिवी कौंसिल में जाती हैं। प्रिवी कौंसिल द्वारा विशेष इजाज़त दिए जाने पर उच्च न्यायालय से सीधे प्रिवी कौंसिल में जाने वाली अपीलों पर भी विधेयक की धारा 5 में उल्लेख किया गया है। उसमें उपबंध है किः
फ्ऐसे निर्णय के विरुद्ध, जिसे यह अधिनियम लागू होता है, अपील करने की विशेष इजाज़त के लिए सपरिषद महामहिम को प्रत्येक आवेदन, जिसका निपटारा नियत दिन के ठीक पूर्व नहीं किया गया है, इस अधिनियम के आधार पर उस दिन फ़ेडरल न्यायालय में अंतरित हो जाएगा।य्
यदि उसका निपटारा हो जाता है अर्थात् वह नामंजूर हो जाता है तो आगे कोई प्रश्न नहीं उठता। यदि यह मंजूर हो जाता है तो प्रिवी कौंसिल इस पर विचार करने के लिए सक्षम होगी। किंतु यदि प्रिवी कौंसिल ने कोई आदेश पारित नहीं किया है तो ऐसी अपील फ़ेडरल न्यायालय को अंतरित समझी जाएगी और प़ेQडरल न्यायालय को मामला निपटाने का अधिकार होगा।
मैं बहुत ही ठोस शब्दों में, सदन को यह बताना चाहता हूँ कि विधेयक क्या करता है और क्या नहीं करता है। मैं सदन को यह बता चुका हूँ कि विधेयक क्या करता है। अब मैं सदन को बताऊंगा कि यह विधेयक क्या नहीं करता।
प्रथमतः, यह आपराधिक मामलों में प्रिवी कौंसिल को अपीलों का उत्सादन नहीं करता। आपराधिक मामलों में उच्च-न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलों पर प्रिवी कौंसिल अब भी विचार कर सकती है। दूसरे, यह ऐसे न्यायालयों के विरुद्ध, जो उच्च न्यायालय नहीं हैं, अर्थात् अजमेर-मारवाड़ या कुर्ग के न्यायिक आयुक्तों के न्यायालयों के विरुद्ध अपीलें प्रिवी कौंसिल में करना उत्सादित नहीं करता। तीसरे, यह फ़ेडरल न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध प्रिवी कौंसिल में अपीलों का उत्सादन नहीं करता।
संभवतः, सदन यह जानना चाहेगा कि विधेयक में ये कमियां क्यों छोड़ी गई हैं और हम विधेयक में यह उपबंध करने की स्थिति में क्यों नहीं है कि दांडिक या सिविल, सभी मामलों में उच्च न्यायालयों में फ़ेडरल न्यायालय में और प़ेQडरल न्यायालय में प्रिवी कौंसिल में पूर्णतया अंतरण किया जाए। इसका कारण वे कतिपय सीमाएं है जिनसे डोमिनियन विधानमंडल अर्थात् संविधान सभा (विधायी) ग्रस्त हैं। जैसाकि सभा के सदस्य इस बात को समझेंगे कि हम प़ेQडरल न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार