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करने के लिए उन शक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं जो हमें भारत शासन अधिनियम की धारा 206 द्वारा दी गई हैं। यदि माननीय सदस्य धारा 206 को देखें तो उन्हें पता चलेगा कि यह इस प्रकार की धारा है जो इस सभा को भारत शासन अधिनियम, 1935 की धारा 205 के उपबंधों को बदलने में सक्षम बनाने के लिये इसे सांविधानिक शक्तियां देती हैं। धारा 206 का कहना हैµ
फ्(1) डोमिनियन विधानमंडल, अधिनियम द्वारा, यह उपबंध कर सकेगा कि ऐसे सिविल मामलों में जो अधिनियम में विनिर्दिष्ट किए जाएँ, उच्च न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या अंतिम ओदश के विरुद्ध अपील उल्लिखित ऐसे किसी प्रमाणपत्र के बिना फ़ेडरल न्यायालय में की जाएगी।
(2) यदि डोमिनियन विधानमंडल अंतिम पूर्ववर्ती उपधारा में वर्णित रूप में ऐसा उपबंध करता है तो सिविल मामलों में उच्च न्यायालयों के विरुद्ध सपरिषद महामहिम सम्राट में प्रत्यक्ष अपील को, विशेष इजाज़त से या उसके बिना पूर्णतया या अंशतः उत्सादित करने के लिए डोमेनियन विधानमंडल के अधिनियम द्वारा परिणामिक उपबंध भी किया जा सकेगा।य्
उपधारा (3) के अनुसार गवर्नर जनरल की मंजूरी अपेक्षित है।
धारा 206 को पढ़ने पर किसी भी व्यक्ति को यह पता चल जाएगा कि यद्यपि फ़ेडरल न्यायाल की अधिकारिता का संशोधन और विस्तार करने की शक्ति इस सभा को दी गई है, किंतु कतिपय मामलों में यह सीमित है। यह सिविल मामलों तक सीमित है। अतः दांडिक मामलों में प्रत्यक्ष अपीलों के उत्पादन के लिए कोई भी उपबंध नहीं किया जा सकता। दूसरे, यह प्रत्यक्ष अपीलों का निर्देश करता है जिसका अर्थ है उच्च न्यायालय से प्रिवी कौंसिल में अपील। प़ेQडरल न्यायालय से प्रिवी कौंसिल में अपीलों को हम क्यों उत्सादित नहीं कर सके, इसका कारण भारत शासन अधिनियम में धारा 208 होना है। धारा 208 कहती है कि (क) इस अधिनियम के निर्वचन से संबंधित किसी विवाद में, अपनी आरंभिक अधिकारिता का प्रयोग करते हुए दिए गए फ़ेडरल न्यायालय के किसी विनिश्चिय के विरुद्ध, प़ेQडरल न्यायालय द्वारा दिए गए किसी भी निर्णय के विरुद्ध कोई अपील सपरिषद महामहिम सम्राट को की जाएगी_ और (ख) किसी अन्य मामलें में फ़ेडरल न्यायालय या सपरिषद महामहिम सम्राट की इजाज़त से। मैं सदन को यह बताना चाहता था कि यदि सभी अपीलों को प्रिवी कौंसिल में फाइल करने के लिए उत्सादित किया जाना और प़ेQडरल न्यायालय की अधिकारिता ऐसे पूर्ण रूप से विस्तारिक करना वांछित होता, जैसा हम इस प्रयोजन के लिए चाहते थे, तो हमारे लिए यह अपेक्षित होता कि संविधान सभा का एक सत्र बुलाया जाए और संविधान सभा में एक विधेयक पारित करने के लिए कहा जाए तो भारत शासन अधिनियम, 1935 के उपबंधों द्वारा आबद्ध नहीं है। इस विधानमंडल की, जिसे डोमिनियन विधानमंडल कहा जाता है, स्थिति बहुत भिन्न है। यह भारत शासन अधिनियम, 1935 द्वारा नियंत्रित है, इसे जो कुछ करना हो