24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वह भारत शासन अधिनियम के उपबंधों के अनुरूप होना चाहिए। जैसा कि मैंने कहा है, एकमात्र अनुज्ञात्मक धारा, जो भारत शासन अधिनियम में हैं वह धारा 206 है और हमने फ़ेडरल न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार अधिकतम संभव सीमा तक करने के लिए इसका संपूर्णज उपयोग किया है। मेरे विचार में इस विधेयक की कमियों से विधानमंडल के किसी भी सदस्य को चिंता नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह अधिनियम बहुत थोड़े समय तक प्रवृत्त रहेगा। जैसे ही हमारा संविधान बन जाता है और संविधान सभा से पारित हो जाता है, हम ऐसी स्थिति में आ जाएंगे कि हम फ़ेडरल न्यायालय की अधिकारिता के लिए और प्रिवी कौंसिल में अपीलों के उत्सादन के लिए एक विस्तृत उपबंध करें। अभी, मेरी राय में, धारा 206 के अधीन जो कुछ किया गया है, सदन को उससे संतुष्ट होना चाहिए। श्रीमान् मैं प्रस्ताव रखता हूँ।
माननीय अध्यक्षः प्रस्ताव पेश किया गया हैः
फ्कि सिविल मामलों में फ़ेडरल न्यायालय की अपीली अधिकारिता के विस्तार का उपबंध करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।य्
ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन, इस विधेयक के संबंध में व्यापक संतुष्टि व्यक्त करने के लिए मैं सदन का आभारी हूँ। अतः, मैं आलोचना के कतिपय बिंदुओं पर, जो कुछ ऐसे माननीय सदस्यों द्वारा उठाए गए हैं जिन्होंने इस वाद-विवाद में भाग लिया है, ही बात करूँगा। आलोचना के प्रथम बिन्दु का संबंध उस बात से है जिसे मैं पूर्ण रूप से नकारने और प्रिवी कौंसिल ने अपीलों का उत्सादन करने तथा फ़ेडरल न्यायालय में पूरी अधिकारिता प्रदत्त करने में संकोच की संज्ञा दे सकता हूँ। मुझे यह बताया गया था कि मैं इस विधानमंडल और संविधान सभा के बीच कृत्रिम अंतर कर रहा हूँ और मैं बिना किसी कारण के इस सदन की शक्तियों को सीमित कर रहा हूँ। मुझे विश्वास है कि यह वह आलोचना है, जिस पर यदि नरमी से विचार किया जाए तो भी वह उचित नहीं है। मैं इस प्रतिपादना को स्वीकार नहीं कर सकता कि संविधान सभा से भिन्न वह विधानमंडल पूर्ण रूप से वैसा ही प्रभुतासंपन्न निकाय है जैसी कि स्वयं संविधान सभा। यह सच है कि जो सदस्य इस सभा में भाग लेते हैं, वहीं संविधान सभा में भी बैठते हैं, अतः व्यक्तियों के संबंध में कोई अंतर नहीं है। किंतु मेरे मन में तनिक भी संदेह नहीं है कि जहां तक कार्यों का संबंध है, दोनों सभाएं बिल्कुल भिन्न हैं। संविधान सभा का काम संविधान तैयार करना है और उसे तैयार करने में वह अपने स्वयं के मत के अतिरिक्त किसी अन्य बात से आबद्ध नहीं हैं। जहां तक इस सभा का संबंध है, यह भारत शासन अधिनियम, 1935 से आबद्ध है जो कि ऐसा संविधान है जो इस विधानमंडल पर आबद्धकर है। ब्रिटिश संसद के अतिरिक्त, जिसे दोनों प्रकार
ऽसं. स. (वि.) वा., खंड III, 11 दिसम्बर, 1947, पृष्ठ 1719-22