378 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
था और अब वह अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सच्चे हिमायती के रूप में इस विधेयक को लेकर आये हैं तथा वह यह चाहते हैं कि विश्व को यह विश्वास कर लेना चाहिये कि भाग-ग राज्यों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के हितों की पहली बार रक्षा की जा रही है।
उन्होंने अपने इस भाषण में जिसका मैंने उल्लेख किया है, इस सदन के अनुसूचित जातियों के माननीय सदस्यों पर यह आरोप लगाया है कि वे अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा करने के लिए पर्याप्त रूप से सतर्क नहीं हैं और सारा श्रेय वह स्वयं लेना चाहते हैं। महोदया, इन कारणों से (व्यवधान)।
श्री सोनावनेः महोदया, मेरा एक व्यवस्था का प्रश्न है। मैं यह जानना चाहता हूँ कि इस सदन के अनुसूचित जाति के सदस्यों के उल्लेख का इस विधेयक से क्या संबंध है? बाहर जो कहा गया है, उसका यहां उल्लेख करना क्या नियमविरुद्ध नहीं है?
श्री जे.आर. कपूरः मैं यह साबित करने की कोशिश कर रहा हूँ कि इस विधेयक के पीछे हेतु क्या है। क्या इसकी कोई आवश्यकता या औचित्य है......?
श्री एथीराजुलू नायडू (मैसूर)ः क्या कोई माननीय सदस्य यह कह सकता है कि माननीय मंत्री अपने हेतु के कारण, विधेयक की विषय-वस्तु के बजाय अन्य बाह्य कारणों से प्रभावित हो गये? उन्होंने यही कहा है और इसी पर वे विस्तारपूर्वक चर्चा कर रहे हैं। महोदया, आप इस पर विचार करें कि क्या किसी सदस्य का व्यक्तिगत हेतु माना जा सकता है।
श्री जे.आर. कपूरः मैं इस पर और चर्चा नहीं करूंगा किन्तु मैं यह महसूस करता हूँ कि..........।
श्री एथीराजुलू नायडूः क्या आप मेरे व्यवस्था के प्रश्न पर अपना विनिर्णय देंगे?
माननीय अध्यक्षः शांति, शांति! माननीय सदस्य मेरा विनिर्णय चाहते हैं। मैं यह कहना चाहूँगी कि इस पहलू पर माननीय सदस्य का ध्यान दिलाया जा चुका है।
उन्हें अपना वक्तव्य देने के लिए कुछ मिनट दिये जा सकते हैं। उसके बाद अन्य माननीय सदस्य भी अपने वक्तव्य दे सकते हैं।
श्री जे.आर. कपूरः महोदया, मुझे हेतु शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए। मैंने पूछा है कि इस विधेयक के पीछे क्या कारण थे? कारण आवश्यकता या औचित्य नहीं है, बल्कि माननीय विधि मंत्री, चुनावों के प्रयोजन के लिए इस विधेयक का इस्तेमाल करना चाहते हैं.......