34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 394

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अध्यक्ष महोदयाः मैं माननीय सदस्य ने यहीं कहूंगी कि वह इस विधेयक के पीछे क्या हेतु रहा इसका जिक्र न करें और विधेयक के गुणागुण पर ही बोलें।

श्री जे.आर. कपूरः मैं विधेयक के औचित्य अथवा अनौचित्य पर पहले की बोल चुका हूँ। इसीलिए मैं इस विधेयक के अनौचित्य पर ही बोल सकता था।

सरदार बी.एस. मान (पंजाब)ः महोदया, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। आपने विनिर्णय दिया कि हेतु पर चर्चा नहीं की जा सकती। क्या हेतु आशय, गुणागुण को एक दूसरे से अलग किया जा सकता है?

अध्यक्ष महोदयाः विनिर्णय यह होगा कि हमेशा हेतु पर ही चर्चा न की जाये।

सरदार बी.एस. मानः यह तो इस पर निर्भर करता है कि कोई किसी बात पर कितना बल देना चाहता है।

अध्यक्ष महोदयाः इस पर हरेक की अपनी राय हो सकती है।

श्री जे.आर. कपूरः यदि आप चाहती हैं कि मैं इस बात पर और बल न दूँ, तो मैं नहीं दूंगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आप दे सकते हैं। मैंने यह सब 25 वर्ष सहा है।

श्री जे.आर. कपूरः मेरे विचार में माननीय विधि मंत्री इतने साहसी है कि वह सरकार में अपने सहयोगियों तक की निंदा कर सकते हैं। उनमें वह साहस और धृष्टता है। मैं यह जानना चाहूंगा कि क्या यह उचित है कि सदन के बाहर एक कैबिनेट मंत्री एक अन्य केबिनेट मंत्री की निंदा करे। (एक माननीय सदस्यः यह सब असंगत बातें हैं।) मैं सोचता हूँ कि ये असंगत नहीं है। संसद में बैठे हुए हम यह चाहेंगे कि हमारा लोकतंत्र सुचारु रूप से चले और इस सदन में माननीय सदस्यों को सदैव सतर्क रहना चाहिये ताकि कोई ऐसा कार्य न हो, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रतिकूल हो और यदि एक कैबिनेट मंत्री और उनके अन्य सहयोगियों के बीच कोई ऐसी बात चल रही हो, तो हमें अपनी आशंका शीघ्रतिशीघ्र व्यक्त करनी चाहिए।

अन्त में मैं यही कहूंगा कि इस सदन का प्रत्येक सदस्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों और विशेषाधिकारों की रक्षा करने में उतनी ही रुचि रखता है जितनी माननीय विधि मंत्री रखते हैं और सम्भवतः उनसे अधिक ही रखते हैं। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोग हर हालत में हमारे बराबर हैं। हम उनके साथ बिल्कुल बराबरी का व्यवहार करना चाहते हैं और मैं तो उन्हें उनसे भी ज्यादा विशेषाधिकार देना चाहता हूं जिसके वे अपनी जनसंख्या के आधार पर हकदार हैं? और उन्हें आप कितना ही प्रतिनिधित्व दें, मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं। परन्तु मेरा निवेदन