34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 396

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में विनिर्दिष्ट अनुसूचित जातियों की सूची में सम्मिलित कर सकेगी या उसमें से अपवर्जित कर सकेगी। किन्तु जैसा ऊपर कहा गया है उसके सिवाय उक्त खंड के अधीन निकाली गई अधिसूचना में किसी पश्चातवर्ती अधिसूचना द्वारा कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।य्

इसलिए इस अनुच्छेद के अधीन राष्ट्रपति इसकी अधिसूचना जारी नहीं कर सकता। यह केवल संसद ही कर सकती है।

श्री जे.आर. कपूरः दूसरी अधिसूचना का प्रश्न ही नहीं उठता क्योंकि राष्ट्रपति ने भाग -ग राज्यों के लिए अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की है।

श्री चन्द्रिका रामः यह मामला विधि मंत्रालय, गृह मंत्रालय और राज्य मंत्रालय के साथ भी उठाया गया था। हम, जो इस सदन में अनूसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे एक मंत्रालय से दूसरे मंत्रालय गये और एक मंत्री के बाद दूसरे मंत्री से सलाह-मशविरा किया। सभी ने कहा कि चूंकि कोई सांविधानिक उपबंध नहीं है, भाग-ग राज्यों के संबध में अधिसूचनाएं जारी नहीं की जा सकतीं। जब मूल विधेयक यहां पेश किया गया। अनुसूचित जातियों के विभिन्न संगठनों ने, विशेष रूप से भारतीय डिप्रेस्ड क्लासिज लीग ने, जिसका मैं जनरल सेक्रेटरी हूँ, इस मामले में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विधि मंत्री और मानवीय श्री जगजीवन राम को भी एक लम्बा ज्ञापन दिया। काफी सोच-विचार के बाद यह प्रस्ताव इस सदन के समक्ष लाया गया है। महोदय, मैं सदन को बता दूँ कि देश के इन केंद्र शासित क्षेत्रों में उन अभागे लोगों के साथ न्याय नहीं किया गया है। हम विभिन्न राज्यों की सरकारों के खिलाफ बहुत कुछ कहते हैं परन्तु भाग-ग राज्यों के बारे में हम क्या कर रहे हैं? मेरे अपने राज्य बिहार में हरिजनों के लिए पढ़ने, लिखने और सेवाओं में भी सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। परन्तु केंद्र शासित क्षेत्रों में स्थिति क्या है? हरिजनों के लिए शिक्षा भी निःशुल्क नहीं है। छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाओं का कोई इन्तजाम नहीं है। इन मामलों से निबटने के लिए भारत सरकार ने एक बोर्ड नियुक्त किया है। गत वर्ष उन्होंने कालेजों में पढ़ने वाले छात्रों से 100 आवेदन पत्र प्राप्त किए, परन्तु केवल पांच या सात को ही छात्रवृत्तियां मिल सकीं। अन्य कई राज्यों में, मेरे बिहार राज्य में भी, कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को 35 रुपये प्रति मास का वजीफा दिया जाता है। अतः केंद्र शासित राज्यों में इन लोगों की दशा बहुत खराब है। जहां तक इन लोगों के प्रतिनिधित्व का संबंध है, उनका इस सभा में कोई प्रतिनिधि भी नहीं है। केंद्र सरकार ने उनकी हमेशा उपेक्षा ही की है।

भाग-ग राज्यों के प्रशासन की जिम्मेदारी केन्द्रीय मंत्रिमंडल की है जिसके माननीय विधि मंत्री भी सदस्य है। क्या मैं पूछ सकता हूँ कि पिछले तीन या चार वर्षों में जब से वह मंत्रिमंडल में हैं, उन्होंने इन लोगों के लिए क्या किया है? मैंने देखा है कि विधि मंत्री जो अपने आपको अनुसूचित जातियों का मसीहा कहते हैं, इस मामले में संविधान सभा में और पिछली बार भी जब भाग-ग राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए एक विधेयक