34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 398

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जातियां हैं और जिन्हें शिक्षा मंत्रालय में भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों के रूप में मान्यता दी गई है। जैसे ही राष्ट्रपति, अनुसूचित जातियों की कोई सूची निकालते हैं, एक अनुसूची प्रकाशित की जाती है और अनुसूचित जातियों ओर अनुसूचित जनजातियों की यह सूची केवल छात्रवृत्ति के प्रयोजनार्थ ही प्रकाशित हो जाती है। मैं माननीय विधि मंत्री से अनुरोध करूंगा कि वह इस सूची को स्वीकार करें ताकि जिनके नाम इस सूची में शामिल किये गये हैं, उन्हें वे सुविधाएं मिल सकें जो अन्य राज्यों में अनुसूचित जातियों को मिल रही हैं। इन शब्दों के साथ में माननीय मंत्री से अनुरोध करूंगा कि वह मेरे संशोधन को जब मैं उचित समय पर इसे पेश करूं, तो स्वीकार कर लें।

सरदार हुकम सिंह (पंजाब)ः चर्चाधीन विधेयक पर कोई आपत्ति नहीं की जा सकती। मेरे विचार में यह आवश्यक है और सही समय पर लाया गया है। मैं अपने मित्र श्री कपूर से सहमत नहीं हूँ जिन्होंने कहा है कि इस विधेयक को लाने की कोई आवश्यकता या औचित्य नहीं था। अनुच्छेद 341 राष्ट्रपति को शक्ति देता है कि वह उन जातियों के नामों की घोषणा करे, जिन्हें अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल किया जा सकता है। परन्तु यदि हम उन अनुच्छेद को पढ़ें, तो आशय यही लगता है कि यह भाग-क और ख राज्यों तक ही सीमित है। उस अनुच्छेद में भाग-ग राज्यों का उल्लेख नहीं है। अतः यह कहा गया कि यह उन राज्यों के राजप्रमुखों अथवा राज्यपालों के परामर्श से किया जायेगा। उस अध्याय में अन्य उपबंध भी भाग-क और ख राज्यों से संबंधित हैं। इसलिए इसमें कोई संदेह नहीं कि जहां तक अनुसूचित जातियों के नामों का उल्लेख करने का संबंध है, भाग ‘ग’ राज्यों में इसकी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। फिर यह कहा गया है कि कठिनाइयाँ दूर करने के लिए राष्ट्रपति अनुच्छेद 392 का प्रयोग कर सकते हैं। परन्तु यदि हम इस अनुच्छेद को ध्यान से देखें, तो वह यहां लागू नहीं होता। यह अनुच्छेद इस प्रकार हैः

फ्राष्ट्रपति किन्हीं ऐसी कठिनाइयों को, जो विशिष्टतया भारत शासन अधिनियम, 1935 के उपबंधों से इस संविधान के उपबंधों के संक्रमण के संबंध में हों, दूर करने के लिए आदेश द्वारा निदेश दे सकेगा.......आदि आदि.......य्

पर इन दोनों अनुच्छेदों का प्रयोग नहीं किया जा सका और इसीलिए इस विधेयक की आवश्यकता पड़ी। फिर यह कहा गया है कि जब राष्ट्रपति द्वारा आदेश किया जाता है तो अनुच्छेद 341 (2) संसद को शक्तियां प्रदान करता है। संसद को उस सूची में से किसी जाति को निकालने या उसमें जोड़ने का अधिकार है। परन्तु मेरे विचार में यह तो एक सामान्य शक्ति है जो संसद को दी गई है, और इसे वह वर्तमान विधेयक को अधिनियमित करने में प्रयोग कर रही हैं।

जैसा मैंने कहा, यह विधेयक आवश्यक है और यह सही समय पर आगामी चुनावों से पहले लाया गया है। प्रत्येक राज्य के लिए अलग सूची है। और मेरे विचार में कुछ