384 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सदस्यों ने ठीक ही कहा कि कुछ अनुसूचित जातियां ऐसी हैं, जिन्हें एक राज्य में अनुसूचित जाति माना जाता है परन्तु पास के राज्य में नहीं माना जाता। सूचियों में कुछ ऐसी प्रविष्टियां भी हैं, जिन पर सन्देह होता है, और इसलिए मैं माननीय मंत्री से कहूंगा कि वे इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करें। जहां तक दिल्ली का संबंध है, क्रमांक 5 और 6 में दो जातियां शामिल हैं अर्थात् बंजारा और बावरिया। परन्तु हिमाचल प्रदेश में इन लोगों को सूची में शामिल नहीं किया गया है, जब कि हिमाचल प्रदेश में भी बंजारा और बावरिया जाति के बहुत लोग रहते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि मेरे मित्र हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत प्रविष्टि संख्या 6 देखेंगे, तो वे पाएंगे कि ‘भांजरा’ जाति का वहां उल्लेख है।
सरदार हुकम सिंहः मैं बंजारा की बात कर रहा हूँ, भाजरा की नहीं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह तो उच्चारण अंतर है।
सरदार हुकम सिंहः नहीं। वे दोनों अलग-अलग जातियां है। बंजारा भांजरा से अलग हैं। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत मद 16 में मजहबी जाति है, परन्तु दिल्ली के अंतर्गत वह नहीं है। ये लोग पंजाब और पेप्सू की सूची में शामिल हैं और विभाजन के बाद उनमें से बहुत से लोग साथ वाले राज्यों में आकर बस गये हैं। उसके अलावा, उनकी एक बड़ी संख्या हिमाचल प्रदेश चली गई है। जब उन राज्यों में स्थानीय अधिकारियों ने आंकड़े एकत्र किए थे, तब उन्होंने सोचा होगा कि उनकी संख्या बहुत कम है, पर यदि उन्हें शामिल नहीं किया गया तो कठिनाई हो जाएगी। ये लोग भूमिहीन मजदूर हैं। बंजारे एक राज्य से दूसरे राज्य में काम की तलाश में घूमते हैं और अपनी जीविका कमाते हैं। यदि उन्हें उनके प्रतिनिधित्व तथा अन्य रियायतों से, जिनके वे हकदार हैं, वंचित किया गया, तो उनके लिए दिक्कत पैदा हो जाएगी। इसी प्रकार एक या दो अन्य प्रविष्टियां हैं। ऐसी एक दिल्ली के अंतर्गत संख्या-19 जुलाहा है। हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत संख्या 14 में इसे कबीरपंथी, या जुलाह या कीर दिखाया गया है। ये कबीर-पंथी और जुलाहा दो अलग-अलग जातियां हैं वे एक नहीं हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कभी-कभी यह दो अलग नामों से एक ही जाति होती है।
सरदार हुकम सिंहः यहां ऐसी बात नहीं है। ये दोनों अलग-अलग जातियां ही हैं। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत प्रविष्टि संख्या 23 हैµरामदासी या रविदासी। परन्तु दिल्ली के अंतर्गत प्रविष्टि संख्या 32 में लिखा है। रामदासिया। मैं माननीय मंत्री से जानना चाहूंगा कि क्या रामदासी या रविदासी दो अलग-अलग जातियां हैं और यदि हैं, और मैं समझता हूँ अवश्य हैं तो उन्हें हिमाचल प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं दिखाया गया है? दिल्ली के अंतर्गत संख्या 33 में इसे रविदासी या रैदासी दिखाया गया है, परन्तु हिमाचल