386 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कर सकेगी। किन्तु जैसा ऊपर कहा गया है उसके सिवाय उक्त खंड के अंतर्गत निकाली गई अधिसूचना में किसी पश्चातवर्ती अधिसूचना द्वारा परिवर्तन नहीं किया जाएगा।य्
भाग 16 के इन उपबंधों को ध्यान में रखते हुए मेरे विचार में जो विधेयक लाया गया है वह नितांत आवश्यक है और श्री कपूर को इसके विरुद्ध नहीं बोलना चाहिए था।
अब मैं इस प्रश्न के दूसरे पहलू को लूंगा जिस पर माननीय विधि मंत्री को ध्यान देना चाहिए। विधेयक में छठी अनुसूची में कुछ जातियों के नामों का उल्लेख किया गया है। परन्तु अन्य राज्यों में अन्य अनुसचित जातियां हैं। ये अनुसूचित जातियां जब दूसरे राज्य में जाती है तो वहां उन्हें अनुसूचित जाति नहीं माना जाता है और उन्हें उन अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है जो उन्हें संविधान द्वारा दिए गए हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। वह अछूत तो बना रहता है और उसके कारण सभी नुकसान सहता है। परन्तु उसे वे लाभ और अधिकार नहीं मिल पाते, जो उसे अपने मूल राज्य में मिल रहे थे। इसलिए मेरा कहना यह है कि यदि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति अपने राज्य से दूसरे राज्य में जाता है, तो उसे वहां भी संविधान के अंतर्गत दी जाने वाली सभी सुविधाएं समान रूप से मिलनी चाहिए। मैं माननीय मंत्री से अनुरोध करूंगा कि वे इस आशय का उपबंध इसमें समाविष्ट करें। अनुसूचित जातियों के लोगों को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के कारण इन विशेषाधिकारों से वंचित रखने की वजह से उनकी एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई है। इसलिए मैं माननीय मंत्री से अनुरोध करूंगा कि वह धारा 3क में इस आशय का एक परन्तुक जोड़ने के बारे में विचार करें कि उन सभी लोगों को, जो अपने राज्यों में अनुसूचित जातियों के लोग माने जाते हैं, यदि वे अपने राज्यों के अलावा किन्हीं अन्य राज्यों में जाते हैं, तो वहां भी उन्हें अनुसूचित जातियों के सभी अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
तीसरी बात जो मैं माननीय मंत्री के ध्यान में लाना चाहता हूँ वह यह है कि अनुसूचित जातियों की सूचियां दोषपूर्ण हैं और ऐसी बहुत-सी जातियों को छोड़ दिया गया है, जो विभिन्न राज्यों में अछूत मानी जाती हैं और उन जातियों को संघीय सूची में और उन राज्यों की सूचियों में भी शामिल करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया है। माननीय मंत्री ने कहा है कि यह सूची व्यापक है और इसमें किसी भी जाति को नहीं छोड़ा गया है। परन्तु उन्होंने यह नहीं देखा कि सभी अनुसूचित जातियों को अनुसूचित जातियों की प्रान्तीय सूची और संघीय सूची में भी शामिल किया जाए। इन अछूत जातियों के बारे में गृह मंत्री को और विधि मंत्री को बहुत से अभ्यवेदन भेजे गए हैं।
माननीय अध्यक्षः क्या माननीय सदस्य बहुत अधिक समय तक बोलेंगे?
श्री सोनावनेः हां, महोदय।