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माननीय अध्यक्षः तब वे अपना भाषण कल जारी रख सकते हैं। तत्पश्चात्, सदन वीरवार, 19 अप्रैल, 1951 के पौने ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित किया गया।
लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयकµजारी
माननीय अध्यक्षः अब सभा माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा 18 तरीख को पेश किये गये निम्नलिखित प्रस्ताव पर आगे विचार जारी रखेगीः
फ्कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का आगे और संशोधन करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्
श्री सोनावने (बम्बई)ः कल जब सदन स्थगित हुआ था, तो मैं कह रहा था कि यह सुनिश्चित करके कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को राज्यों और संघ की सूचियों में से न निकाला जाये, उनके हितों की रक्षा करने में विधि मंत्रालय की असफलता के कारण किस प्रकार उन जातियों के एक राज्य से दूसरे राज्य में आने-जाने पर रोक लग जायेगी। मैं इस संबंध में एक ठोस उदाहरण प्रस्तुत करना चाहूंगा। बम्बई में माहर नामक एक जाति है। इस जाति के लोग दिल्ली आ गये, परन्तु इस जाति को दिल्ली में अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
इस प्रकार इन लोगों को संविधान के अंतर्गत कोई भी सुविधा नहीं मिलेगी क्योंकि उनकी जाति दिल्ली राज्य की अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल नहीं है। दूसरे शब्दों में यदि वे बम्बई रहते जो उन्हें सभी विशेषाधिकार और सुविधाएं मिलती। अतः मेरा कहना यह है कि यदि जातियां एक राज्य से दूसरे राज्य में जाती हैं, तो भी उन्हें संविधान के अंतर्गत सभी विशेषाधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए। आज यह बात नहीं है। विभिन्न राज्यों में सभी अनुसूचित जातियों को मान्यता न देने के लिए उनके आने-जाने पर पाबंदी लग गई है। अतः मैं माननीय विधि मंत्री से आग्रह करूंगा कि वह इस ओर ध्यान दें और एक व्यापक सूची तैयार करें, जिससे इन जातियों के आने-जाने पर लगी रोक हटाई जा सके।
इस संबंध में मैं एक और उदाहरण देना चाहता हूँ। बम्बई राज्य से कुछ जातियां मध्य भारत चली गईं और वहां से सूची में शामिल नहीं हैं। इस तरह की तीन या चार जातियां हैं। यद्यपि वे अछूत हैं, उन्हें संविधान के अंतर्गत मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। मेरे एक अनुपूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए, माननीय विधि मंत्री ने कहा था कि अनुसूचित जातियों की सूची का आधार अस्पृश्यता है। इसलिए मैं उनसे जानना चाहूंगा कि सभी अस्पृश्य लोगों को राज्यों और संघ की सूचियों में लाने के लिए उन्होंने क्या किया है। यहां सत्ता में होने के बावजूद भी वह अछूतों के प्रति अपने कर्त्तव्य का पालन नहीं कर सके हैं। उन्हें आगामी चुनावों से पहले इस गलती को सुधारने का प्रयत्न करना चाहिए।