388 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अब मैं दूसरी बात पर आता हूँ। अजमेर, भोपाल, कच्छ और त्रिपुरा जैसे राज्यों में जहां अनुसूचित जातियों को एक से अधिक सीट नहीं मिलती, अब बिल्कुल भी प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। अच्छा होता यदि विधि मंत्रालय कोई ऐसा तरीका निकालता जिससे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को बारी-बारी से संयुक्त प्रतिनिधित्व मिल जाता। अब इन जातियों को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। हालांकि उन राज्यों में उनकी संख्या काफी है। अतः मैं माननीय विधि मंत्री से अनुरोध करूंगा कि वह इन लोगों को बारी-बारी से संयुक्त प्रतिनिधित्व देने का कोई तरीका निकालें।
आखिरी बात जो मैं कहना चाहता हूँ वह यह है कि संविधान के अंतर्गत उन्हीं अछूतों अथवा अनुसूचित जनजातियों को, जो इस रूप में सूची में शामिल हैं, राज्यों और संघ द्वारा मान्यता दी जाती है और संविधान के अंतर्गत उन्हें ही सुविधाएं दी जाती हैं। ऐसी सूचियां बिलासपुर, कुर्ग और अण्डमान तथा निकोबार राज्यों द्वारा नहीं बनाई गई हैं। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को ऐसी सूचियों के अभाव में, उन राज्यों में रहने वाले इन लोगों को उनकी शिक्षा और सेवाओं में उन्नति के लाभ नहीं मिलेंगे। अतः मेरा अनुरोध है कि ऐसी सूची तैयार की जाये, ताकि इन सभी लोगों को संविधान के अंतर्गत सभी सुविधाएं मिल सकें।
एक बार और मैं सरकार को इस विधेयक को लाने के लिए धन्यवाद देता हूँ और माननीय विधि मंत्री से अनुरोध करता हूँ कि वे मेरे सुझावों को विधेयक में शामिल कर लें।
पं. मुनीश्वर दत्त उपाध्याय (उत्तर प्रदेश)ः इस बात पर बल देने की आवश्यकता नहीं है कि यह सदन अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों ही हितों की रक्षा करने के बहुत उत्सुक है, क्योंकि हमारी कांग्रेस सरकार और इस सदन के सदस्य जिनमें से अधिकांश महात्मा गांधी के नेतृत्व में काम करने वाले कांग्रेसी ही हैं, इस कार्य में जो महात्मा गांधी को बहुत प्रिय था, पूरी रुचि लेते रहे हैं। मेरे विचार में इस सदन में या बाहर लोगों को यह आश्वासन देने की कोई आवश्यकता नहीं है कि जहां तक अनुसूचित जाति को लोकसभा और राज्य विधानमंडलों में प्रतिनिधित्व देने का प्रश्न है हम उनके हितों की रक्षा करने में विशेष रुचि रखते हैं। परन्तु ऐसा लगता है कि माननीय सदस्यों को कुछ ऐसे तथ्यों का पता है जिनके कारण उन्हें कल कुछ टिप्पणियां करनी पड़ी थीं।
जहां तक इस विधेयक की भावना का संबंध है, यह एक प्रशंसनीय और स्वागत-योग्य विधेयक है जिसमें लोक सभा और राज्य विधानमंडलों में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की जा रही है। परन्तु यह व्यवस्था उसी सूरत में की जानी चाहिये, यदि वर्तमान विधि में इसके लिए कोई उपबंध न हो।