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माननीय अध्यक्षः विभिन्न पहलुओं के अंतर्गत कुछ भी कहा जा सकता है। परन्तु संविधान के शब्द मौजूद हैं और यह विधेयक सदन के समक्ष है और मेरे विचार में सदस्यगण अन्य सदस्यों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास करेंगे कि यदि उन्हें एक या दो बार समझा दिया जाये तो वे सभी पहलू समझ जायेंगे। उन्हें दोहराने से क्या लाभ है?
श्री द्विवेदी (विन्ध्य प्रदेश)ः यद्यपि विधेयक भाग-ग राज्यों से संबंधित है, इन राज्यों के किसी सदस्य को अभी तक बोलने की अनुमति नहीं दी गई है। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या आप भाग-ग राज्यों के किसी सदस्य को कुछ कहने का मौका नहीं देंगे?
माननीय अध्यक्षः मेरी समझ में नहीं आता कि माननीय सदस्य ऐसा क्यों सोच रहे हैं कि उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई। प्रत्येक सदस्य को अनुमति है। परन्तु प्रत्येक सदस्य को बोलने का अवसर नहीं मिलता। यह विधेयक भाग-ग राज्यों तक ही सीमित है। मेरे विचार में मैं ठीक ही कह रहा हूँ। (माननीय सदस्यः हां, हां।) कोई सदस्य अधिक से अधिक यही कह सकता है कि जिन राज्यों से यह विधेयक संबंधित है उन राज्यों के सदस्यों को भी अवसर दिया जाना चाहिये।
कैप्टेन ए.पी. सिंह (विन्ध्य प्रदेश)ः हम विन्ध्य प्रदेश से आते हैं।
माननीय अध्यक्षः यह आग्रह करना वांछनीय नहीं होगा कि क्योंकि ‘‘भाग-ग य् शब्द वहां हैं, इसलिए भाग ‘ग’ राज्यों से आने वाले प्रत्येक सदस्य को इस पर बोलने का अधिकार है। परन्तु मुझे उस पहलू पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। मैं निगरानी रख रहा हूँ और मैं वही तरीका अपनाऊंगा जो सबसे उचित होगा।
श्री द्विवेदीः मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि आप उन्हीं सदस्यों को बोलने का अवसर दें, जो भाग-ग राज्यों से संबंधित है और जिनका मामला यहाँ विचाराधीन है।
माननीय अध्यक्षः उन्हें अपना मामला कहने दीजिए। परन्तु माननीय सदस्य तो उस श्रेणी में नहीं आते।
श्री द्विवेदीः श्रीमन्, मैं विन्ध्य प्रदेश से आता हूँ।
माननीय अध्यक्षः मुझे खेद है। हां, विन्ध्य प्रदेश है। परन्तु मैं उनको प्राथमिकता देना चाहता हूँ, जो स्वयं अनुसूचित जातियों से हैं। अन्य सदस्यों को थोड़ा सहयोग करना चाहिए और अनुसूचित जातियों के लोगों को पूरा मौका देना चाहिए। मैं माननीय सदस्य श्री मूलदास को बोलने का अवसर दे रहा हूँ, क्योंकि वह उस जाति के हैं। मेरे पास सूची है और मेरे विचार में यह बात है कि कौन उस जाति के हैं और किन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हमें इस बात पर ज्यादा बहस नहीं करनी चाहिए।
श्री एम.बी. वैश्य (बम्बई)ः श्रीमन, मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि आपने मुझे इस विधेयक पर बोलने का अवसर दिया। माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत इस