392 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विधेयक पर हुई बहस को सुनने के बाद मैं भी अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूँ। महात्मा गांधी के प्रादुर्भाव के बाद ही, जो हमारे सच्चे हिमायती थे, हम यह महसूस करने लगे कि हम भी इंसान हैं। कई स्थानों पर माननीय डॉ. अम्बेडकर ने कहा है कि अनुसूचित जातियों के लोग अंग्रेजों के जमाने में ज्यादा खुश थे और अब नेहरू सरकार के अधीन वे खुश नहीं हैं। मुझे यह सुनकर बड़ा धक्का लगा। हमारा देश सत्य बोलने के लिए प्रसिद्ध है। पांच वर्ष के बालक प्रहलाद में अपने पिता के सामने सत्य बोलने का साहस था। हम हरिजनों के लिए महात्मा गांधी ने बहुत कुछ किया और वर्तमान कांग्रेसी सरकार भी बहुत कुछ कर रही है, फिर भी हमारी दशा इतने लम्बे अर्से से
खराब होती जा रही है। हमारी गरीबी आसानी से दूर नहीं की जा सकती।
हमारे लिये बहुत कुछ करना होगा। परन्तु जब मैं देखता हूँ कि हमारे नेता हमारे लिये भरसक प्रयास नहीं कर रह हैं, तो मुझे बहुत दुःख होता है। ठीक-ठाक चलती गाड़ी के रास्ते में रोड़े नहीं अटकाने चाहिये। भारत में सेवा के मार्ग को हमेशा योगियों का मार्ग माना गया है। और हम सदियों से उसी मार्ग पर चलते आ रहे हैं और हमने हर संभव तरीके से समाज की सेवा की है। स्वराज्य आंदोलन के दौरान कम से कम मेरे राज्य, गुजरात में तो, लोगों ने हमारे दूसरे मित्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है और इसीलिये हम भिखारियों की तरह उनसे कोई भीख नहीं मांगना चाहते। आज हम समानता और भाईचारे के आधार पर उनसे अपने न्यायोचित अधिकार मांगते हैं। आज हमारी अपनी सरकार है और संसद और इसके सदस्यों का यह कर्तव्य है कि वे हमारे साथ न्याय करें। इस सब चीजों के बावजूद भारत में अभी भी ऐसे बहुत से स्थान हैं, जहां हमारे दूल्हे घोड़ी पर नहीं चढ़ सकते, हरिजनों को बसों में नहीं बैठने दिया जाता और हमारी महिलाओं को महंगे वस्त्र और आभूषण नहीं पहनने दिये जाते। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी जगह ऐसी स्थिति है। निस्संदेह हमारे लिये बहुत कुछ किया जा रहा है, परन्तु अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। परन्तु मैं इतना कृतघ्न नहीं हूँ कि हमारे कल्याण के लिये इतना किये जाने के बावजूद यह कहूँ कि हमारे लिये कुछ नहीं किया जा रहा है तथा हम अंग्रेजों के जमाने में अधिक खुश थे। ‘फूट डालो और राज्य करो’ की उनकी नीति के कारण अंग्रेजों ने हमारे में से कुछ पढ़े-लिखे लोगों को चुन लिया था और उन्हें वे अपना बराबर का साथी मानते थे तथा उन्हें हर संभव तरीके से लाभ पहुंचाने की कोशिश करते थे। वे लोग अंग्रेजों के जमाने में अधिक खुश थे। परन्तु आज समूचे हरिजन समुदाय को लाभ मिल रहा है और सरकारी पक्ष में बैठे हमारे प्रतिनिधि सरकार पर दबाव डालकर हमारे लिये बहुत कुछ करा सकते हैं। परन्तु सरकार की बदनामी करके और उसके खिलाफ जाकर हमें कोई लाभ नहीं होगा, उलटे भारी हानि होगी। डॉ. अम्बेडकर एक महान् विद्वान है। अतः मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वह उन्हें सद्बुद्धि दे ताकि वे ऐसे