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करते हैं कि उन्हें नाजायज तरीके से छोड़ दिया गया है और यदि हम उन सूचियों को उन सूचियों से मिलायें जो 1935 के ऐक्ट के अंतर्गत ‘आर्डर-इन-कौंसिल’ का आधार थीं, तो हम पाएँगे कि बहुत-सी जातियों को निस्संदेह छोड़ दिया गया है। यदि यह कहा जाये कि जिन जातियों को छोड़ दिया गया है, वे अब अछूत नहीं रहीं और उनकी सामाजिक स्थिति बदल गई है, तो अलग बात है। हमें नहीं मालूम कि सभा इसे स्वीकार करेगी या नहीं, लोग इसे स्वीकार करेंगे या नहीं। जब हमने 1935 ऐक्ट की अधिसूचियों के रूप में इन सूचियों को तैयार कराया था, तब काफी जांच की गई थी और लोगों को बताया गया था कि उनके अधिकार क्या हैं और उन्हें किस के लिए लड़ना चाहिये। परन्तु इस अवसर पर ऐसी कोई बात नहीं की गई। मुझे पता नहीं कि ये सूचियां जिन्हें राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ प्रकाशित किया गया है किसने तैयार की हैं। मुझे नहीं मालूम कि इस विधेयक में उल्लिखित सूचियों के बारे में क्या जांच की गई है। ये बातें लोगों के दिमाग में उत्सुकता जगाती हैं और इसलिए सरकार को इस संबंध में एक ऐसा तरीका निकालना चाहिये, जो अधिक से अधिक लोगों को संतोषजनक लगे।
यह विधेयक विशेष मेरे विचार में आवश्यक है क्योंकि इसमें कुछ भाग-ग राज्यों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने का प्रस्ताव है। मेरे विचार में इसकी सूचियां तैयार की जानी चाहिएं और यहाँ उन्हें एक बार में बनाया गया है या नहीं यह एक अलग बात है। परन्तु यह विधेयक अनावश्यक नहीं है। मुझे ऐसा नहीं लगता कि हमारे संविधान में ऐसा कोई निश्चित उपबंध है, जिसके अनुसार हम इस विधेयक को अधिनियमित कर रहे हैं। जहां तक मैं जानता हूँ, इस विधेयक को लाने का एक ही औचित्य है कि जहां कहीं भी अनुसूचित जातियों के लोग रहते हैं, वहां उनके लिए कुछ सीटें अवश्य आरक्षित कर दी जानी चाहिएं। यह केवल इसलिए है कि अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण का उपबंध है। मैं नहीं जानता कि क्या संविधान में कोई ऐसा उपबंध है, जिसके अनुसार हम यह व्यवस्था कर सकते हैं। यदि कोई है तो वह अनुच्छेद 341 और 342 में है, जो भाग-ग राज्यों पर लागू नहीं होते। यह एक तकनीकी आपत्ति है। मैं चाहता हूँ कि भाग-ग राज्यों में भी सीटों का आरक्षण होना चाहिए और अनुसूचित जातियों के नामों की सूची बनाई जानी चाहिए। इस बारे में कोई मतभेद नहीं हो सकता। परन्तु मैं चाहूंगा कि जब मेरे माननीय मित्र अपना उत्तर दें, तो वह यह जरूर बतायें कि संविधान में वह उपबंध कहां है जिसके अनुसार यह प्रतिनिधित्व दिया जाना ईप्सित है और यह विधेयक एकदम नियमानुकूल है?
जहां तक सूचियों का संबंध है, मैं चाहता हूँ कि लोगों को यह जानने के लिए कि उसके अधिकारों की कितनी रक्षा की जा रही है और समय दिया जाना चाहिए था। मुझे बहुत से समुदायों से अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं जो चाहते हैं कि उनके नाम शामिल किये जायें। यह भी सम्भव है कि बहुत से पिछड़े लोगों को अभी तक पता ही न चला हो