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अंतर है। आप सदन में इन बातों में परिसीमन समितियों के निर्णयों की उपेक्षा करके जल्दबाजी से काम नहीं ले सकते और येनकेन प्रकारेण चुनाव नहीं करा सकते। और भी बहुत सी रुकावटें आयेंगी, जिनमें समय लगेगा। यदि यही सब होगा तो इस विधेयक को पारित करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिये और इस प्रकार उन लोगों को प्रतिनिधित्व से वंचित नहीं करना चाहिए, जो इस विधेयक की अनुसूचियों में शामिल होना चाहते हैं। मैंने दो जातियों के संबंध में एक संशोधन दिया है, परन्तु ऐसी और भी बहुत-सी जातियां होंगी, जो चाहेंगी कि उन्हें सुना जाये। मेरा आग्रह है कि इस पूरे मामले को थोड़ा-थोड़ा करके यहीं निपटाया जाना चाहिये। हमें एक समेकित विधेयक लाना चाहिए, ताकि जिस प्रकार की आपत्तियां की गई हैं, वे आगे न हों। मैं अपना संशोधन पेश करूंगा और आशा करता हूँ कि माननीय मंत्री इसे स्वीकार कर लेंगे।
श्री आर. वेलायुधन (ट्रावनकोर-कोचीन)ः मेरी इस विधेयक पर बोलने की इच्छा नहीं थी, क्योंकि मेरे विचार में इसमें किसी विवाद की कोई गुंजाइश नहीं थी। मुझे खुशी है कि माननीय अध्यक्ष ने यह विनिर्णय किया कि इस सभा के बाहर जो बातें उठाई गई हैं, उसके लिए सदन के समक्ष इस विधेयक पर हो रही बहस में कोई स्थान नहीं होना चाहिये। मैं अपने आपको एक या दो बातों तक ही सीमित रखूंगा, हालांकि इन बातों का उल्लेख कुछ माननीय सदस्यों द्वारा पहले किया जा चुका है क्योंकि मेरे विचार में यही समय है जब हमें अनुसूचित जातियों से संबंधित अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहिए।
यह सदन ही नहीं समूचा देश अनुसूचित जातियों की समस्याओं में रुचि ले रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में जो महान् कार्य किया गया है, उसी के कारण हम इन जातियों के प्रतिनिधि के रूप में सदन में मौजूद हैं। परन्तु मैं यहां, हमारे महान् नेता डॉ. अम्बेडकर ने जो महान सेवाएं की हैं, उनका भी उल्लेख करना चाहूंगा। मेरे विचार से महात्मा गांधी, श्री जिन्ना और डॉ. अम्बेडकर ऐसी विभूतियां हैं, जिन्हें लोगों का भरपूर प्यार और आदर मिला है......
श्री सोनावनेः और जिन्होंने देश का बंटवारा किया है।
श्री आर. वेलायुधनः और जो इस शताब्दी में लोगों के भाग्य और विचारों को एक दिशा दे सके हैं, अतः आदर के पात्र हैं।
श्री सोनावलेः मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। क्या यह सब विधेयक से संगत हैं?
श्री आर. वेलायुधनः हां।
माननीय अध्यक्षः जिस माननीय सदस्य ने यह बात उठाई है उसे बिना किसी टोका-टोकी के सुना गया है। मेरे विचार में वह वही विशेषाधिकार अन्य सदस्यों को भी देना चाहेंगे।