34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 415

400 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

भविष्य है। मैं आशा विहीन नहीं हूँ। डॉ. अम्बेडकर निराशावादी हो सकते हैं, परन्तु जहां तक मेरा संबंध है और अनुसूचित जातियों के नौजवानों का संबंध है, मैं और वे अपनी आजादी की लड़ाई बराबरी के आधार पर लड़ने का पर्याप्त साहस रखते हैं।

माननीय अध्यक्षः शांति, शांति। माननीय सदस्य विधेयक का विरोध कर रहे हैं या उसका समर्थन कर रहे हैं?

श्री आर. वेलायुधनः मैं विधेयक का बिल्कुल भी विरोध नहीं कर रहा हूँ। मैं तो यह अनुरोध कर रहा हूँ कि तथ्यों का ठीक-ठीक पता लगाकर जहां-जहां आवश्यक हो, वहां-वहां तैयार की गई सूची में परिवर्तन किये जायें। इस अनुरोध के साथ, मैं विधेयक का समर्थन करता हूँ।

श्री देश बंधु गुप्ता (दिल्ली)ः मैं इस विधेयक का समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूँ। विधेयक में भाग-ग राज्यों के हरिजनों को लोक सभा में प्रतिनिधित्व दिलाने का प्रयास किया जा रहा है और इस पर सभा में किसी को भी कोई आपत्ति नहीं हो सकती। परन्तु मैं यह बताना चाहूंगा कि इस विधेयक के प्रस्तावक डॉ. अम्बेडकर ने जो यह कारण बताया है कि जब इस सभा के समक्ष लोक प्रतिनिधित्व विधेयक लाया गया था, तब इसका उल्लेख स्पष्टरूप से नहीं किया गया था, सही नहीं लगता। यह आरक्षण तो दस वर्ष की अवधि के लिए एक अस्थायी आरक्षण पर और सम्भवतः इसी कारण से कुछ क्षेत्रों को आरक्षण के बिना छोड़ देना वांछनीय समझा गया था, ताकि यह देखा जा सके कि क्या हरिजन आरक्षण के बिना भी लोक सभा में चुन कर आ सकते हैं। (एक माननीय सदस्यः इसमें तो बहुत संदेह है।) मेरे मित्र कह रहे हैं कि इसमें बहुत संदेह है। मैं इस पर उनसे कोई शर्त नहीं लगाना चाहता। परंतु जहां तक दिल्ली का संबंध है, मैं विधेयक के प्रस्तावक और अन्य मित्रों को यह बता दूं कि दिल्ली और अजमेर ही केवल दो ऐसी जगह हैं, जहां पुराने शासनकाल में भी संयुक्त मतदान था, जबकि शेष सारे देश में पृथक मतदान था और इसी आधार पर सीटों का आरक्षण किया गया था, तो दिल्ली ने ही संयुक्त मतदान के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवार को जिसका प्रतिक्रियावादी ताकतों ने भारी विरोध किया था, सेन्ट्रल असेम्बली में चुन कर भेजा था। यद्यपि कांग्रेस के मुसलमान उम्मीदवार का विरोध करने के लिए भारत के सभी भागों से विरोधी शक्तियां दिल्ली में जमा हो गई थीं, तथापि दिल्ली ने संयुक्त मतदान के सिद्धांत को सर्वोपरि ठहराया और अल्संख्यक समुदाय के उम्मीदवार को चुनकर भेजा। मैं इसे एक विशेष सम्मान की बात समझता यदि दिल्ली और भाग-ग राज्यों को सीटों के आरक्षण के बिना हरिजन उम्मीदवारों को चुनकर भेजने का अवसर दिया जाता। इससे हमें यह अंदाजा भी हो जाता कि दस वर्ष बाद जब आरक्षण नहीं होगा, तो स्थिति क्या होगी। परन्तु मेरे मित्र इस विधेयक के प्रस्तावक ने, जो दुर्भाग्य से हमेशा अलग ही सोचते हैं, इस विधेयक को लाना ठीक समझा। अब चूंकि विधेयक पुरःस्थापित कर