34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 419

404 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय अध्यक्षः क्या माननीय सदस्य और समय लेना चाहते हैं।

श्री द्विवेदीः हां, श्रीमन्।

तत्पश्चात् सदन मध्या“न भोजन-काल के लिए ढाई बजे तक के लिए स्थगित हुई।

सदन मध्याह्य-भोजन काल के पश्चात ढाई बजे पुनः समवेत हुई।

(पं. ठाकुर दास भार्गव पीठासीन हुए।)

श्री द्विवेदीः श्रीमन्, सदन में मैंने जो बातें कही वे आपने सुनी होंगी। मैं यह बात विशेष रूप से कहना चाहता हूँ कि सरकार ने राज्यों को विभिन्न भागों में उसी तरह बांट रखा है, जैसे कि हमारा समूचा समाज विभिन्न श्रेणियों में बंटा हुआ है जैसे सवर्ण, अवर्ण, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आदि।

श्री अमोलक चंद (उत्तर प्रदेश)ः माननीय मंत्री को उपस्थित नहीं हैं।

माननीय अध्यक्षः वह जल्दी आ जायेंगे।

एक माननीय सदस्यः उनकी जगह किसी और मंत्री आ जाना चाहिए।

माननीय अध्यक्षः वह एक या दो मिनट में आ जायेंगे। माननीय सदस्य अपना भाषण जारी रख सकते हैं।

श्री द्विवेदीः मैं यह कह रहा था कि राज्यों को भी उसी तरह वर्गीकृत कर दिया गया है। जिस तरह लोगों को अनुसूचित जातियों अथवा अनुसूचित जनजातियों में बांटा गया है। मैं माननीय मंत्री से यह कहना चाहता हूँ कि वे इस विधेयक में उल्लिखित विभिन्न भागों के बारे में उसी तरह विधान लाने की बात क्यों नहीं सोचते, जिस तरह उन्होंने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के बारे में विधेयक पेश किया है।

श्री सिवन पिल्ले (ट्रावनकोर-कोचीन)ः श्रीमन्, मेरा यह व्यवस्था का प्रश्न है। सदन में मंत्रियों की सभी सीटें खाली पड़ी हैं।

माननीय अध्यक्षः माननीय मंत्री शीघ्र ही आ जायेंगे।

श्री द्विवेदीः मेरे विचार से मैं अपना भाषण जारी रख सकता हूँ।

माननीय अध्यक्षः हां।

श्री गोयन्कर (मद्रास)ः सुनेगा कौन?

श्री द्विवेदीः मेरे विचार में जो मैं कहूंगा उसे कार्यविधि में नोट कर लिया जायेगा। उदाहरण के लिए, विन्ध्य प्रदेश के कुछ भागों को अन्य राज्यों में मिला दिया गया है। रामपुर, टिहरी गढ़वाल और कुछ अन्य राज्यों को संबंधित राज्यों की विधानसभाओं में