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और संसद में भी उचित संरक्षण दिया गया है, परन्तु विन्ध्य प्रदेश के उन इलाकों की ओर, जिनका इस विधेयक में उल्लेख किया गया है, कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
श्री गोएन्काः वे शिकायत कर रहे हैं कि सदन में सत्तापक्ष से कोई भी उपस्थित नहीं है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सत्तापक्ष सदन के लिए एकदम अनावश्यक है।
श्री द्विवेदीः चूंकि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों आदि के लिए विधान लाया गया है, हमारी पहली चिंता यह होनी चाहिए कि हम उन इलाकों को, जिनका विलय हो गया है। ऐसा न समझें कि उन्हें कोई भी कहीं भी रख सकता है। इन इलाकों को राज्य विधानसभाओं में समुचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
अब, श्रीमन् मैं आपका ध्यान एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे की ओर दिलाना चाहता हूँ। संविधान के अनुच्छेद 330 के खंड-2 में कहा गया हैः
फ्(2) खंड 1 के अधीन किसी राज्य में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात, लोक सभा में उस राज्य को आबंटित स्थानों की कुल संख्या यथाशक्य वही होगा, जो स्थिति उस राज्य की अनुसूचित जातियों की अथवा उस राज्य की या उस राज्य के भाग की अनुसूचित जनजातियों की, जिनके संबंध में स्थान इस प्रकार आरक्षित हैं, जो जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की कुल जनसंख्या से है।य्
इस संबंध में मैं यह कहना चाहता हूँ कि चूंकि 1950 के अधिनियम 43 में भाग-ग राज्यों समेत सभी राज्यों में सीटों के आबंटन के संबंध में स्पष्ट उल्लेख है और संविधान के अनुच्छेद 330 के खंड 2 में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सीटें जनसंख्या के अनुपात में आबंटित की जायेंगी, इस विधेयक के लाने का कोई कारण नजर नहीं आता। संविधान के अनुच्छेद 341 में विशेष रूप से कहा गया हैः
फ्(1) राष्ट्रपति, किसी राज्य के संबंध में राज्यपाल या राजप्रमुख से परामर्श करने के पश्चात्, लोक अधिसूचना द्वारा, उन जातियों, मूलवंशों या जनजातियों, अथवा जातियों, मूलवंशों या जनजातियों के भागों या उनमें के यूथों को विनिर्दिष्ट कर सकेगा, जिन्हें इस संविधान के प्रयोजनों के लिए उस राज्य के संबंध में अनुसूचित जातियां समझा जाएगा।य्
इसी तरह अनुसूचित जाति के संबंध में अनुच्छेद 342 में एक उपबंधकिया गया है। मैं यह जानना चाहता हूँ कि जब अनुच्छेद 341 और 342 के अधीन राष्ट्रपति को एक अधिसूचना जारी करके यह सब करने का अधिकार है तो फिर यह विधेयक लाने की क्या आवश्यका थी। यदि अनुच्छेद 330 में अनुसूचित जातियों के लिए इस प्रकार के