410 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कैप्टेन ए.पी. सिंहः मैं इस विधेयक के उद्देश्य के विरुद्ध नहीं हूँ, जो कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व का उपबंध करता है। इसमें जो बहुत से मुद्दे उठाये गये हैं, उनके बारे में मुझे केवल यही कहना है कि मैं डॉ. अम्बेडकर के विचारों से सहमत हूँ। उन्होंने स्वयं कहा है कि अनुच्देद 341 और 342 भाग-क और ख राज्यों के संबंध में लागू होते हैं और अनुच्छेद 330 और 332 भी क और
ख राज्यों के बारे में लागू होते हैं। फिर उन्होंने यह भी कहा है कि भाग ग राज्यों की अनुसूचित जातियों और जनजातियों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए कोई विशिष्ट उपबंध नहीं हैं। उन्होंने यह बात उद्देश्यों और कारणों के कथन में स्वीकार की है। अब वे यह महसूस करते हैं क्योंकि इन लोगों के लिए भी सीटें आरक्षित करना आवश्यक है, इसलिए संसद में विधान अधिनियमिति करके उन्हें प्रतिनिधित्व अवश्य प्रदान किया जाना चाहिए। इसका मतलब यह हुआ कि वे संसद के लिए यह करने की विशेष शक्तियां चाहते हैं। इस विधेयक को लाने के पीछे उनका यही उद्देश्य है।
इस संबंध में मेरा निवेदन है कि जब संविधान की रचना की जा रही थी, तो वे स्वयं संविधान सभा के सदस्य थे। यदि हम जानना चाहते हैं कि भाग ग राज्यों के लिए उपबंध क्यों नहीं किया गया तो हमें संविधान की भावना पर विचार करना होगा कि मात्र ग राज्यों की अनुसूचित जातियों और जनजातियों को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं किया गया? उसके कोई निश्चित कारण रहे होंगे। यहां तक मैं समझ सकता हूँ भाग ग राज्यों की समूची जनसंख्या को हरिजन समझा गया, क्योंकि उन सभी को पिछड़े लोग माना गया था। सीटों के आरक्षण का यह अधिकार अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जातियों को केवल इसलिए दिया जाता है कि वे पिछड़े वर्ग हैं और चूंकि इन राज्यों के लोगों को पिछड़े वर्ग के लोग माना गया है, इसलिए उन्हें पृथक प्रतिनिधित्व देने के लिए कोई उपबंध नहीं किया गया है। अतः अब ऐसा कोई उपबंध नहीं है तो क्या हमें इस बात के लिए सहमत हो जाना चाहिए कि उन्हें कोई अधिकार नहीं दिये जाने चाहिए और अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए कोई पृथक प्रतिनिधित्व नहीं होना चाहिए? मेरा निवेदन यह है कि संविधान में एक और भी धारा है जो ऐसा उपबंध करती है और उन्हें उस अनुच्छेद के अंतर्गत जो मेरे विचार में भाग ग राज्यों के संबंध में है, ये अधिकार दिये जाने चाहिए। वे अनुच्छेद 239 और 240 हैं। श्रीमन् मैं आपका ध्यान अनुच्छेद 240 की ओर दिलाना चाहता हूँ, जिसके अनुसार इन लोगों को यह अधिकार दिया जा सकता है। अनुच्छेद 239 विशेष शक्तियों के संबंध में है और अनुच्छेद 240 इस प्रकार हैः
फ्(1) संसद, विधि द्वारा, पहली अनुसूची के भाग ग में विनिर्दिष्ट तथा मुख्य आयुक्त अथवा उपराज्यपाल द्वारा प्रशासित किसी राज्य के लिएµ
(क) उस राज्य के विधानमंडल के रूप में कार्य करने के लिए कोई निकाय, नामनिर्देशित, निर्वाचित, आंशिक रूप से नाम निर्देशित अथवा आंशिक रूप से निर्वाचित_ अथवा