34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 427

412 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उन्हें इस विधेयक को स्थगित कर देना चाहिए और इसके स्थान पर एक ऐसा विधेयक लाना चाहिए जिसके माध्यम से भाग क राज्यों वाली सभी शक्तियां भाग ग राज्यों को भी मिल सके। तब यह उद्देश्य स्वतः ही पूरा हो जायेगा। वे इस सभा के संविधान के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं, क्योंकि इस विधेयक के जरिये, वे केवल अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को ही अधिकार दे रहे हैं। परन्तु हम सह हरिजन हैं और इसलिए ऐसा कदम उठाने से पहले अन्य सभी लोगों को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से अलग करना होगा, अर्थात् उन्हें पहले अधिक अधिकार देने होंगे, जैसा कि भाग क और भाग ख राज्यों के मामले में किया गया है। उन्हें पहले यह करना चाहिए और फिर इस प्रकार का विधेयक लाना चाहिये वर्ना मेरी राय में यह सब व्यर्थ है।

इसके ब्यौरे पर विचार करने और इसके कारण बताने में काफी समय लगेगा। श्री अय्यंगर ने भी अपने भाषण में कहा है कि जहां हम हिमाचल प्रदेश और विन्ध्य प्रदेश का संबंध है, उनके लिए एक विधेयक शीघ्र ही लाया जायेगा। यह तैयार हो रहा है और हम स्थायी समिति में हैं। समिति ने इस पर विचार कर लिया है और यद्यपि इस समय यह बहुत असन्तोषजनक है, तथापि हम आशा करते हैं कि इसमें लोगों की इच्छाओं के अनुरूप आवश्यक सुधार कर दिये जायेंगे। अब यह कहा जा रहा है कि दिल्ली को भी एक सीट आबंटित की जानी चाहिए। मेरा निवेदन है कि दिल्ली को यह अधिकार देने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। यह कहा जा रहा है कि चूंकि यह देश की राजधानी है, इसलिए हमें यह अधिकार नहीं दिया जा सकता। श्रीमन् मैं यह कहना चाहूंगा कि जब कलकत्ता भारत की राजधानी था तो वहां भी लेफिटनेंट गर्वनर था, परन्तु कलकत्ता के लोगों को पूरे अधिकार प्राप्त थे। इसी तरह शिमला भी वर्ष की कुछ अवधि के लिए भारत की राजधानी रहा करता था और चूंकि वह पंजाब में था, लेफिटनेंट-गवर्नर भी वहां रहा करते थे। परन्तु दो सरकारों के एक स्थान से ही कार्य करने के कारण कभी कोई कठिनाई हुई। इसलिये यह तर्क मेरी समझ में नहीं आता कि दिल्ली के लोगों को यह अधिकतर इसलिए नहीं मिलना चाहिए कि दिल्ली देश की राजधानी है। मैं तो यह महसूस करता हूँ कि दिल्ली के लोगों को और अधिक अधिकार दिये जाने चाहिए, क्योंकि वे तो राजधानी में ही रह रहे हैं। श्री रामचन्द्र ने कहा थाः फ्सब ते प्रिय मोहि यहां के बासी, मम धम्दा पुरी सुखरासी (मैं अपने स्थान के लोगों को सबसे अधिक प्यार करता हूँ क्योंकि यह धनधान्य और समृद्धि की भूमि है।)। उन्होंने यह बात अयोध्या के लिए कही थी। अतः जब दिल्ली के लोगों को ही अधिकार देने में इतनी हिचकिचाहट है, तो मुझे खेद से कहना पड़ता है कि अन्य लोगों को और भी अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए मेरी राय में दिल्ली के लोगों को सन्तुष्ट रखना परमावश्यक है, क्योंकि यह भारत की राजधानी है और उन्हें किसी भी प्रकार से असंतुष्ट रखना कोई बुद्धिमत्ता नहीं होगी। अधिक उचित तो यह होता कि हम उस क्षेत्र में जिसका हम प्रशासन चला रहे हैं, जनमत संग्रह करा लेते।