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माननीय अध्यक्षः क्या मैं माननीय सदस्य का ध्यान इस तथ्य की ओर दिला सकता हूँ कि हम दिल्ली की समस्या पर चर्चा नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक पर चर्चा कर रहे हैं?
कैप्टेन ए.पी. सिंहः चूंकि यह दिल्ली में भी लागू किया जा रहा है, इसलिए मैं सोचा कि मुझे यह कहना चाहिए कि दिल्ली को भी वे अधिकार मिलने चाहिए हो हम प्राप्त करने का प्रयत्न कर रहे हैं। मेरा केवल यही मतलब था। यदि ऐसी बात है तो मैं उस पर चर्चा नहीं करूंगा। मेरा निवेदन यह है कि मणिपुर और त्रिपुरा जैसे छोटे राज्यों की जिम्मेदार सरकारों को इन सुधारों से क्यों वंचित किया जा रहा है। औंध एक छोटा-सा राज्य है, परन्तु उसे सबसे पहले जिम्मेदार सरकार दी गई है। इसलिए मुझे इसका कारण समझ नहीं आता कि मणिपुर और त्रिपुरा जैसे अन्य छोटे राज्यों को एक जिम्मेदार सरकार से क्यों वंचित रखा जा रहा है और वहां एक तरह का जिम्मेदार प्रशासन स्थापित क्यों नहीं किया जा रहा है। ऐसे अन्य बहुत से राज्य हैं, जहां जिम्मेदार प्रशासन नहीं है, किन्तु मेरे पास उनके बारे में बोलने के लिए समय नहीं है।
दूसरी बात मैं विन्ध्य प्रदेश के हरिजनों की जनसंख्या के बारे में कहना चाहता हूँ। वह कितनी है? अनुसूचित जनजातियों के बारे में कोई आंकड़े नहीं दिये गये हैं। परन्तु ऐसा लगता है कि दोनों की जनसंख्या लगभग नौ लाख है, अर्थात् कुल जनसंख्या के एक-चौथाई से थोड़ा सा कम। परन्तु उन्हें कुल आबंटित सीटों का एक-तिहाई दिया जा रहा है अर्थात् छह सीटों में से दो सीटें दी जा रही हैं जबकि उनकी आबादी एक-चौथाई से भी कम है। यदि माननीय डॉ. अम्बेडकर इसे उचित समझें और यह मेरा उनसे व्यक्तिगत अनुरोध है कि उन्हें विन्ध्य प्रदेश को एक और सीट आबंटित करनी चाहिए, ताकि जनसंख्या का अनुपात किसी हद तक ठीक हो सके। यद्यपि मैंने इस आशय का कोई संशोधन पेश नहीं किया है तथापि यह मेरा उनसे अनुरोध है कि यदि वे यह करने के लिए तैयार हो जाते हैं, तो बहत अच्छा होगा। मेरा माननीय डॉ. अम्बेडकर से अनुरोध है कि वे यदि उचित समझें तो इस विधेयक को रोक लें और इसके स्थान पर उस आशय का दूसरा विधेयक लाएं। यदि वे राजी हों तो मैं उन्हें अपना विधेयक दे सकता हूँ जिसे मैंने पूरी तरह तैयार कर रखा है। यह एक छोटा विधेयक होगा, जिसमें कहा जायेगा कि भाग ग राज्यों को और अधिक अधिकार दिये जायें और वहां जिम्मेदार सरकारें स्थापित की जायें। यदि यह कर दिया जाये, तो समस्या अपने आप हल हो जाएगी। मुझे केवल यही कहना है।
माननीय अध्यक्षः मेरे विचार में इस पर काफी चर्चा हो चुकी है। अतः मैं अब डॉ. अम्बेडकर को अपना भाषण देने के लिए बुलाता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कल जब श्री कपूर ने एक सांविधानिक प्रश्न उठाया कि संविधान में कतिपय अनुच्छेद हैं, जिन्हें देखते हुए यह विधेयक अनावश्यक है और मैं यह विधेयक किसी और उद्देश्य से लेकर आया हूँ, तो मुझे इस बात पर विश्वास