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के राज्यपाल या राजप्रमुख के परामर्श से ही जारी कर सकता है। जो संविधान पढ़ेगा उसे पता चल जायेगा कि राज्यपाल या राजप्रमुख का उल्लेख करने का मतलब यह हुआ कि यह भाग क और ख के बारे में ही है, क्योंकि राज्यपाल अथवा राजप्रमुख केवल भाग क और ख राज्यों में हैं। यदि अनुच्छेद 341 में यह स्पष्ट रूप से कहा जाता कि राष्ट्रपति ऐसी अधिसूचना मुख्य आयुक्त के परामर्श से जारी कर सकते हैं, तो निस्संदेह यह मान लिया जाता कि राष्ट्रपति को अनुच्छेद 341 और 342 के अंतर्गत भाग ग राज्यों के संबंध में भी अधिसूचना जारी करने का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त किया गया है। दुर्भाग्य से या सौभाग्य से ऐसा खण्ड अनुच्छेद 341 में नहीं रखा गया।
मेरे माननीय मित्र ने जो सबसे आखिर में बोले, पूछा कि मैं यह बताऊं कि भाग ग राज्यों में अनुसूचित जातियों के बारे में अधिसूचना जारी करने का अधिकार राष्ट्रपति को देने के संबंध में संविधान में कोई उपबंध क्यों नहीं रखा गया। मेरे विचार में जब यह मामला संविधान सभा के समक्ष आया था, उस समय जिन सदस्यों ने संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों पर चर्चा में भाग लिया था, उन्हें याद होगा कि इस प्रश्न पर काफी विवाद हुआ था। सभी ने यह महसूस किया था, कि इस क्षेत्र में राजनीति घुस जायेगी, किसी जाति विशेष को सूची से निकालने या सूची में शामिल करने के लिए राष्ट्रपति को राजनीतिक कारणों से प्रेरित होकर सलाह दी जायेगी। परिणामस्वरूप हमें इस अनुच्छेद का प्रारूप तैयार करने में सबसे अधिक सावधानी बरतनी पड़ी। इस बात पर भी दिल दिया गया है राष्ट्रपति को एक बार आदेश दिये जाने के बाद इसमें परिवर्तन करने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें भी राजनीति आ जायगी। यह इस तथ्य से स्पष्ट है कि दोनों अनुच्छेदों में खंड (2) जोड़ा गया, क्योंकि यह महसूस किया गया कि एक बार आदेश दिये जाने के बाद यदि उसमें परिवर्तन की मांग की जाती है तो वह परिवर्तन सदन द्वारा अनुसूचित जातियों के संसद सदस्यों की जानकारी से किया जाना चाहिए। इसी कारण इन अनुच्छेदों का प्रारूप पूरी सावधानी के साथ तैयार किया गया था।
मेरा कहना यह है कि जिन माननीय मित्रों ने यह कहा कि यह विधेयक अनावश्यक है, उन्होंने अनुच्छेद 341 को बिल्कुल नहीं समझा और उसे गलत पढ़ा है। जैसा कि मैंने अपनी प्रारम्भिक टिप्पणियों में कहा, जब तक हमें ये दो बातें पता नहीं होंगी कि अनुसूचित जातियां कौन हैं और उनकी जनसंख्या कितनी हैं, अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण की कोई योजना बनाना एकदम असम्भव है। जैसा मैंने कहा था यदि यह मामला अनुच्छेद 341 के अंतर्गत आता, तो भाग ग राज्यों में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व के लिए उपबंध करने के लिए इस सदन में आना एकदम अनावश्यक होता, क्योंकि तब राष्ट्रपति को भाग ग राज्यों में अनुसूचित जातियों का और उनकी जनसंख्या का पता लगाने के लिए वही शक्ति प्राप्त होती तो उसे भाग क और ख राज्यों में अनुसूचित जातियों के संबंध में है ताकि निर्वाचन आयुक्त निर्वाचन-क्षेत्रों का आसानी से परिसीमन