34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 434

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में कुछ जातियां अछूत थीं, परन्तु कुछ अन्य जातियां कुछ जिलों में अछूत थीं और कुछ जिलों में नहीं थीं। इसलिए उनकी सूची अलग से तैयार की गई। सम्भवतः गृह विभाग ने अधिसूचना जारी करते समय यह सोचा होगा कि यह क्षेत्रीय भेदभाव न किया जाए और उन सभी को अछूत माना जाए।

बम्बई में, कोई परिवर्तन नहीं है। पुराने ‘आर्डर इन कौंसिल’ में चौंतीस जातियों का उल्लेख है और इस अधिसूचना में छत्तीस जातियां दिखाई गई हैं। अर्थात् दो जातियां अधिक दिखाई गई हैं।

मेरे विचार में मेरे लिए यह आवश्यक नहीं है कि मैं पूरी सूची को लूं। जहां तक भाग ‘क’ राज्यों का संबंध है, मेरे विचार में वहां शिकायत की कोई गुंजाइश नहीं है। भाग ख राज्यों के बारे में ऐसा आश्वासन देना मेरे लिए सम्भव नहीं है, क्योंकि 1935 के अधिनियम के अंतर्गत भाग ख राज्यों के लिए ऐसी कोई सूचियां तैयार की गईं। परिणामस्वरूप सूचियां बहुत नई हैं। और हो सकता है उनमें कुछ गलतियां भी हों। मैंने देखा कि बलिया जैसी एक महत्वपूर्ण जाति का नाम सूची में नहीं है। भाग ख राज्यों के बारे में तुलना करने के लिए मेरे पास कोई आधार भी नहीं है। पर भाग क राज्यों की सूची एक समुचित सूची है।

मेरे मित्र ने दिल्ली का जिक्र किया और संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जारी किए गए कुछ पत्र पेश किए। यह सच है कि सूची में काफी बड़ी संख्या दिखाई गई है, परन्तु मैंने इसकी जांच की है। और मैं यह कहने के लिए तैयार हूँ कि इस विधेयक में जो सूची हमने शामिल की है, उसमें लगभग 90 प्रतिशत वे जातियां शामिल हैं। उसमें कुछ नाम दो बार आ गए हैं और कुछ जातियों को दो अलग नामों से पुकारा जाता है।

डॉ. देशमुखः 64 में से केवल 39 जातियां हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कुछ लोगों को रामदासिया और रविदासया भी कहा जाता है। कुछ लोग धानुक और धानु कहलाते हैं। यह जानना बहुत मुश्किल है कि वे दो जातियां हैं या दो अलग-अलग नामों से एक ही जाति है। मैं इस प्रकार की भूल को सुधारने और उन्हें दो अलग जातियां दिखाने के लिए भी तैयार हूँ।

एक माननीय सदस्य आंकड़े चाहते थे। मैं उन्हें बता दूं कि बिल्कुल सही अनुपात सुनिश्चित करने के लिए हमने पूरी सावधानी बरती है।

मेरे विचार में मैंने चर्चा के दौरान उठाये गये सभी मुद्दों का उत्तर दे दिया है। इन शब्दों के साथ मैं प्रस्ताव पारित किये जाने की सिफाशि करता हूँ।

श्री ऐथिराजुलु नायडुः मैं माननीय मंत्री से एक स्पष्टीकरण चाहता हूँ। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की अनुच्छेद 341 और 342 में एक तरह से परिभाषा की गई है परन्तु यह भाग क और भाग ख राज्यों के संबंध में है और संविधान में भाग