34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 437

422 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जातियों और अनुसूचित जनजातियों के संबंध में लोक सभा में सीटें किस अनुपात में आरक्षित की जायेंगी, इसके लिए एक निश्चित फार्मूला दिया गया है। वे उनकी संख्या के अनुपात में होंगी। यहां संख्या की तो एकदम उपेक्षा की गई है और मनमाने ढंग से एक यहां और एक वहां, सीटें आरक्षित की गई हैं। हो सकता है आज विन्ध्य प्रदेश, दिल्ली आदि के किसी भाग ग राज्य में रहने वाली अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की विशिष्ट संख्या का मिश्रित रूप से पता हो, परन्तु पांच साल बाद स्थिति क्या होगी। इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। आज सुबह ही मेरे माननीय मित्र श्री देशबंधु गुप्ता ने हमें बताया कि देश के विभिन्न भागों से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोग बड़ी संख्या में दिल्ली आएं और हो सकता है कि विधेयक में उल्लिखित विभिन्न भाग ग राज्यों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आंकड़ों में अगले पांच वर्षों में कोई भारी परिवर्तन आ जाये। उस समय कठिनाई यह होगी कि हमें इस विधेयक में भी संशोधन करना पड़ेगा। इसलिये चूंकि संविधान में ही एक मिश्रित फार्मूला दिया हुआ है, इस संसद को उस फार्मूले को नहीं बदलना चाहिए। किसी विशेष समय में यह पता लगाना कि भाग क, ख और ग में किसी राज्य विशेष के संबंध में लोक सभा में कितनी आरक्षित सीटें होंगी, निर्वाचन आयुक्त का काम है। अतः मेरा निवेदन है कि प्रस्तावित धारा 3 क का उप-खंड (1) संविधान के प्रतिकूल है और अनावश्यक भी है।

माननीय अध्यक्षः संशोधन पेश किया गयाः

फ्खंड 2 में, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की प्रस्तावित धारा 3 क के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जायेःµ

फ्3 क भारत के संविधान के अधीन लोक सभा में स्थान आरक्षित करने के प्रयोजनार्थ, छठी अनुसूची में उल्लिखित जातियां भाग ग राज्य के संबंध में, जिसके अंतर्गत वे इस प्रकार उल्लिखित की गई हैं, अनुसूचित जातियां होंगी और सातवीं अनुसूची में उल्लिखित जनजातियां भाग ग राज्य के संबंध में, जिसके अंतर्गत वे इस प्रकार उल्लिखित की गई हैं, अनुसूचित जनजातियां होंगी।य्

श्री संथानम (परिवहन और रेल राज्य मंत्री)ः क्या मेरे माननीय मंत्री यह सुझाव दे रहे हैं कि संसदीय विधान के बिना निर्वाचन आयुक्त किसी भी राज्य की सीटों की एक निश्चित संख्या आबंटित कर सकते हैं? यह कार्य तो संसद को करना होगा।

माननीय अध्यक्षः जैसा कि मैं समझ पाया हूँ, मुद्दा यह है कि अनुच्छेद 330 में यह आवश्यक निदेश पहले ही दिया हुआ है कि प्रतिनिधित्व जनसंख्या के अनुपात में होगा। इसलिए निर्वाचन आयोग को निदेश मिल चुका है और अब यह उसे देखना है