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कि इसे कैसे अमल में लाया जाये। यह इस सदन का काम नहीं है कि वह यह देखे कि प्रत्येक राज्य को वास्तव में कितनी सीटें दी जाएं........
श्री संथानमः श्रीमन्, यदि मैं इसको ठीक से समझ पाया हूँ, तो यह निर्देश संसद के लिए है, निर्वाचन आयुक्त के लिए नहीं। क्योंकि सीटों की वास्तविक संख्या का निर्धारण संसद द्वारा किया जाता है, निर्वाचन आयुक्त संख्या निर्धारित नहीं कर सकता।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह विनिर्दिष्ट अनुच्छेद 82 है, जो लोक सभा में प्रतिनिधित्व से संबंधित है। यह अनुच्छेद इस प्रकार हैः
फ्अनुच्छेद 81 के खंड (1) में किसी बात के होते हुए भी, संसद विधि द्वारा, पहली अनुसूची के भाग ग में विनिर्दिष्ट किसी राज्य के या किसी ऐसे राज्यक्षेत्र के, जो भारत के राज्यक्षेत्र में तो हो, परन्तु किसी राज्य में उक्त खंड में उपबन्धित आधार या रीति के सिवाय किसी अन्य आधार या रीति से सम्मिलित न हो, लोक सभा में प्रतिनिधित्व के लिए उपबंध कर सकेगी।य्
हम जानते थे कि वही सिद्धांत भाग ग राज्यों पर लागू नहीं हो सकता, इसीलिए एक विशेष अनुच्छेद की रचना की गई।
श्री जे.आर. कपूरः क्या मैं बता सकता हूँ कि अनुच्छेद 82 को अनुच्छेद 341 से कोई संबंध नहीं है। अनुच्छेद 82 में कहा गया है कि जहां तक भाग ग राज्यों का संबंध है, लोक सभा में प्रतिनिधित्व का आधार, जैसा कि भाग क और भाग ख राज्यों के संबंध में अनुच्छेद 81 में स्पष्ट रूप से कहा गया है, भिन्न हो सकता है। अनुच्छेद 81 के अंतर्गत प्रतिनिधित्व का आधार हैः प्रत्येक 6 से 7 ½ लाख लोगों के लिए एक प्रतिनिधि पर अनुच्छेद 81 में सीटों के आरक्षण का कोई जिक्र नहीं है। अतः अनुच्छेद 82 की आड़ में, यह संसद अनुच्छेद 330 के विनिर्दिष्ट उपबंध की अवहेलना करने का अधिकार नहीं ले सकती। जैसा कि आपने सही फरमाया, श्रीमन्, अनुच्छेद 330 के अंतर्गत निर्वाचन आयुक्त को कुछ हिसाब लगाने का निर्देश स्पष्ट रूप से दिया गया है। यह तो एक थोड़ा-सा हिसाब-किताब है और इसके लिए संविधान-निर्माताओं ने संसद को परेशान करना ठीक नहीं समझा। यह मामूली हिसाब-किताब निर्वाचन आयुक्त कर सकता है और संसद को थोड़ा भी फेरबदल करने की जरूरत नहीं है।
श्री संथानमः यदि आप अनुच्छेद 81(2) और (3) को देखें तो आप पायेंगे कि सभी फेरबदल संसद को ही विधि द्वारा करने होते हैं। प्रत्येक जनगणना के पूरा होने पर, विभिन्न निर्वाचन-क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व के संबंध में संसद विधि द्वारा निर्णय लेगी, निर्वाचन आयुक्त अधिसूचना द्वारा संसद में स्थान आबंटित नहीं कर सकता।
श्री जे.आर. कपूरः मेरे माननीय मित्र श्री संथानम से जो बात अभी कही, उससे मैं सहमत हूँ और इस समय भी हम एक लोक प्रतिनिधित्व विधेयक पहले ही पारित कर चुके हैं। परन्तु हम इस समय जिस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं, वह यह नहीं है