34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 441

426 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गया है। मेरा कहना यह है, अन्यथा मेरे माननीय मित्र बता सकते हैं कि संविधान के किस उपबंध के अधीन यह सदन इन जातियों की ऐसी स्वतंत्र सूची तैयार कर सकती है, जिसके आधार पर ये सीटें भाग ग राज्यों को आबंटित की जा सकें।

मध्या“न पश्चात् 4.00 बजे।

माननीय डॉ. वी.आर. अम्बेडकरः पहले मैं श्री कपूर के संशोधन को लेता हूँ। वह अनुच्छेद 330 का सहारा लेते रहे हैं, जिसमें अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व के लिए उपबंध है। यदि मैंने उन्हें ठीक समझा है तो उनका कहना यह है कि यह उपबंध भाग क और ख राज्यों के लिए ही नहीं, बल्कि भाग ग राज्यों के लिए भी पर्याप्त है। हमारे बीच बस यही मतभेद है। मेरा कहना यह है कि एक पृथक उपबंध, जैसा कि इस विधेयक में दिया हुआ है, आवश्यक है। वह कहते हैं कि यह आवश्यक है क्योंकि यह अनुच्छेद 330 के अंतर्गत आ जाता है। मेरे विचार में मैंने उनकी बात ठीक से प्रस्तुत कर दी है। बस यही बात है।

इस विधेयक को लाकर मैंने जो रास्ता अपनाया है उसके पक्ष में मुझे यह निवेदन करना है कि संविधान के अनुच्छेद 366 में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की परिभाषा दी गई है। अनुच्छेद 366 का खंड (24) इस प्रकार हैः

फ्अनुसूचित जातियोंय् से वे जातियां, मूलवंश या जनजातियां अथवा जातियों, मूलवंशों या जनजातियों के भाग या समूह अभिप्रेत हैं, जिन्हें इस संविधान के प्रयोजनों के लिए अनुच्छेद 341 के अधीन अनुसूचित जातियां समझा जाता है।य्

अब इस बात पर विवाद हो सकता है कि अनुच्छेद 330 में उल्लिखित फ्अनुसूचित जातियांय् क्या वे ही फ्अनुसूचित जातियांय् हैं, जिसकी परिभाषा अनुच्छेद 366 के खंड (24) में दी गई है। भाग ग राज्यों की अनुसूचित जातियां उस खंड के अर्थ में अनुसूचित जातियां नहीं कही जा सकतीं।

श्री जे.आर. कपूरः यही व्यवस्था करने के लिए मैंने संशोधन दिया है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं उस पर आ रहा हूँ। अतः विवादास्पद बात यह है कि अनुच्छेद 330, जिसमें यह निदेश दिया गया है कि प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर होगा, उन अनुसूचित जातियों के संबंध में लागू न हो जो अनुच्छेद 366 के खंड (24) में दी गई परिभाषा की परिधि में नहीं आतीं। चूंकि स्थिति ऐसी ही है, इसलिए उसके लिए अलग उपबंध करना जरूरी है। श्री कपूर के मुद्दे के उत्तर में मुझे यही कहना है।

पं. मुनीश्वर दत्त उपाध्याय द्वारा उठाये गये मुद्दे के बारे में, अनुच्छेद 82 सर्वाधिक व्यापक अर्थ में लेखबद्ध है। इसमें कहा गया हैः