34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 442

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फ्अनुच्छेद 81 के खंड (1) में किसी बात के होते हुए भी, संसद, विधि द्वारा, पहली अनुसूची के भाग ग में विनिर्दिष्ट किसी राज्य के लिए लोक सभा में प्रतिनिधित्व का उपबंध कर सकेगी।य्

मेरा निवेदन यह है कि यह शक्ति इतनी व्यापक है कि भाग ग राज्यों के लोक सभा में प्रतिनिधित्व के लिए उपबंध करते समय संसद निस्संदेह कह सकती है कि इतनी सीटें अनुसूचित जातियों को आबंटित की जायेंगी और इतनी सीटें साधारण सीटें होंगी। मैं नहीं समझता कि वे एक विशिष्ट उपबंध के रूप में इससे अधिक और क्या चाहते हैं। यदि किसी भाग ग राज्य के लिए लोक सभा में प्रतिनिधित्व के लिए उपबंध करते समय संसद यह निर्णय लेती है कि अनुसूचित जातियों के लिए एक निश्चित आरक्षण होगा, तो उसमें यह बताने की भी निहित शक्ति् है कि अनुसूचित जातियां कौन-कौन सी हैं।

श्री जे.आर. कपूरः क्या मैं एक शब्द बोल सकता हूँ?

माननीय अध्यक्षः उत्तर के रूप में?

श्री जे.आर. कपूरः मुझे पता नहीं कि मुझे उत्तर देने का अधिकार है या नहीं।

माननीय अध्यक्षः यदि माननीय सदस्य माननीय विधि मंत्री द्वारा अभी दिये गये उत्तर पर विचार करें तो वह कदाचित अपने संशोधन के लिए आग्रह नहीं करेंगे।

श्री जे.आर कपूरः मैं एक छोटा-सा निवेदन करूंगा और फिर आपके मार्गदर्शन पर चलूंगा।

माननीय अध्यक्षः जो मैं समझता हूँ उसे मैं दोहराना चाहूंगा ताकि जो बात वह कहना चाहते हैं, उसके साथ-साथ वह यह भी बता सकें कि क्या मैंने स्थिति को समझने में कोई भूल की है।

माननीय विधि मंत्री यदि मैं गलत हूँ तो वे मेरी गलती ठीक कर सकते हैंµअनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के नामों आदि का उल्लेख करने में अपनी कठिनाई बताई, जो सम्भव है, और इससे हमारे लिए बहुत असुविधाजनक स्थिति पैदा हो सकती है। फ्अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियोंय् की परिभाषा अनुच्छेद 366 (24) और (25) में दी गई है। उस परिभाषा में उन जातियों और जनजातियों का विशेष रूप से उल्लेख है जिन्हें विशिष्ट अनुच्छेद 341 और 342 के अंतर्गत अनुसूचित जातियां या जनजातियाँ माना जाता है। परिणामतः जहां तक भाग ग राज्यों का संबंध है, यह कहा जा सकता है कि संसद द्वारा परिभाषित अनुसूचित जातियों को संविधान के अंतर्गत घोषित अनुसूचित जातियों के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती। जहां तक संविधान के अंतर्गत अनुसूचित जातियों का संबंध है, उसके बारे में अनुच्छेद 330 एक साधारण निदेश देता है, परन्तु भाग ग राज्यों में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व के मामले अनुच्छेद 330 के अंतर्गत नहीं आते। क्या यही आशय है?