34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 445

430 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

खंड 2 विधेयक में जोड़ा गया।

खंड 3 (छठी और सातवीं अनुसूची आदि का जोड़ा जाना।)

माननीय अध्यक्षः यहां बहुत से संशोधन हैं जिनमें वर्तनी या नामों को उचित क्रम में रखने के लिए छोटी-मोटी शुद्धियां की गई हैं। उदाहरणार्थ, एक श्ुद्धि ऐसी है जिसके द्वारा फ्आदि-धर्मीय् शब्द प्रतिस्थापित किया गया है। यह तो स्पष्टतः वर्तनी की गलती है। इसे ठीक कर दिया जायेगा। क्या इसे संशोधन के रूप में लेना जरूरी है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मुझे यहां यह बताना होगा कि खंड उसे प्रस्तावित छठी अनुसूची में शीर्षक फ्दिल्लीय् के अंतर्गत, प्रविष्टि 14 में, फ्धानकय् शब्द के पश्चात्, फ्अथवा धानुकय् शब्द अंतःस्थापित किया जाये। इससे कुछ सदस्यों को संतुष्टि होगी।

माननीय अध्यक्षः इस सूची में श्री चन्द्रिका राम का संशोधन संख्या 4 है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरा संख्या 5 है। किसी का भा संशोधन लिया जा सकता है।

माननीय अध्यक्षः मैं फ्आदि-धर्मीय् विषयक संशोधन को लूंगा। श्री चन्द्रिका राम का संशोधन संख्या 2 है जिसे माननीय विधि मंत्री अपना संशोधन संख्या 3 मान रहे हैं।

श्री जे.आर. कपूरः वह दूसरे रूप में, अर्थात् फ्आद-धर्मीय्, जिसका सही शब्द फ्आदि-धर्मीय् है।

श्री चन्द्रिका राम (बिहार)ः यह फ्आदि-धर्मीय् होना चाहिए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं उनका संशोधन स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।

माननीय अध्यक्षः क्या माननीय सदस्य श्री चन्द्रिका राम संशोधन संख्या 4 के संदर्भ में विधि मंत्री का संशोधन स्वीकार करते हैं?

कुछ माननीय सदस्यः दोनों एक ही हैं।

माननीय अध्यक्षः मेरे विचार में माननीय मंत्री का संशोधन (संख्या 5) श्री चन्द्रिका राम के संशोधन (संख्या 4) से अच्छा है। और मेरे विचार में विधि मंत्री का संशोधन संख्या 7 भी, श्री चन्द्रिका राम के संशोधन संख्या 6 से अच्छा है।

डॉ. देशमुखः मैं अपने संशोधन संख्या 8 को चाहता हूँ।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने पूरी सूची अच्छी तरह देख ली है और