431
अधिकारियों से सलाह भी कर ली हैं। संख्या 8 में दिये गये संशोधन कभी भी अनुसूची का अंग नहीं थे।
मैं संशोधन संख्या 8 को स्वीकार नहीं करता हूँ।
संशोधन किये गयेः
खंड 3 में, प्रस्तावित छठी अनुसूची में, फ्दिल्लीय् शीर्षक के अंतर्गत, प्रविष्टि संख्या 1 में, फ्अधर्मीय् के स्थान पर फ्आदि-धर्मीय् प्रतिस्थापित किया जाये।
(-श्री चन्द्रिका राम)
खंड 2 में, प्रस्तावित छठी अनुसूची में,
फ्दिल्लीय् शीर्षक के अंतर्गत, प्रविष्टि 14 में, फ्धानकय् के पश्चात् फ्अथवा धानुकय् अन्तःस्थापित किया जाये।
(µडॉ. अम्बेडकर)
खंड 3 में, प्रस्तावित छठी अनुसूची में, फ्दिल्लीय् शीर्षक के अंतर्गत, प्रविष्टि संख्या 34 में, फ्रेगढ़य् के पश्चात् फ्अथवा रैगढ़य् अंतःस्थापित किया जाये।
(µडॉ. अम्बेडकर)
डॉ. देशमुखः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः
खंड 3 में, प्रस्तावित छठी अनुसूची में, फ्दिल्लीय् शीर्षक के अंतर्गत, अन्त में, निम्नलिखित नई प्रविष्टियां जोड़ी जाएंः
फ्40 नाई
41 धीवरय्
मेरे भाषण का उत्तर देते हुए माननीय विधि मंत्री ने कहा कि मैं सरकार से असंतुष्ट हूँ। अभी हाल ही में उन्होंने जो भाषण दिया उससे लगा कि वे भी सरकार से जिसका वे अंग हैं, बहुत प्रसन्न नहीं हैं।
श्री सिधवाः क्या नाई अछूत हैं?
डॉ. देशमुखः मैं यह संशोधन उस अभ्यावेदन के बल पर ला रहा हूँ जो मुझे दिया गया है। दूसरे, माननीय विधि मंत्री ने जिस सूची का जिक्र किया, वह सूची संघ लोक सेवा आयोग, भारत द्वारा 12 मार्च, 1949 को जारी की गई अधिसूचना है। उसमें ये दोनों जातियां शामिल हैं।