432 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(पं. ठाकुरदास भार्गव पीठासीन हुए।)
जैसा कि मैंने अपने भाषण में कहा, इस सूची के अनुसार दिल्ली में इन जातियों की संख्या 64 है। मैंने उन सभी जातियों को शामिल करने का सुझाव नहीं दिया है, जिन्हें छोड़ दिया गया है। मैंने तो केवल उन दो जातियों को शामिल करने का सुझाव दिया है जो यहां सूची में भी दर्ज हैं। मेरे विचार में यह बहुत ही अनुचित बात है कि माननीय विधि मंत्री इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। फिर भी मैं उसके लिए आग्रह करूंगा और आशा करता हूँ कि इस सदन के सभी माननीय सदस्य सहर्ष मेरे पक्ष में मत देंगे, क्योंकि यह तो स्पष्ट रूप से भेदभाव है। एक उद्देश्य के लिए आपने एक अधिसूचना जारी कर रखी हैं, जिसमें कुछ जातियां शामिल की गई हैं। यह अधिसूचना मान्य है और न तो विधि मंत्री ने और न ही सरकार ने इस सूची को अस्वीकार करने के लिए कोई कदम उठाये हैं। इन जातियों में पैदा होने वाले किसी भी लड़के को इस अधिसूचना के अंतर्गत अपने आपको अनुसूचित जाति का उम्मीदवार कहकर आवेदन करने का अधिकार है। परन्तु यहां मैं यह नहीं समझता कि किन कारणों से माननीय डॉ. अम्बेडकर उन्हें शामिल नहीं करना चाहते। ये दोनों जातियां इस सूची में मौजूद हैं इस गजट कापी में भी हैं, जिसे कोई भी सदस्य आकर देख सकता है। ये छोटे मछुआरे जिन्हें धींवर या झींवर कहा जाता है। यह नाम भी वहां हैं। कहा जाता है यह सूची की मद में हैं। इसलिए मैं आशा करता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर जो भी निर्णय लें, यह सदन मेरा समर्थन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि इन दोनों जातियों को इन विशेषाधिकारों से वंचित न किया जाए, क्योंकि ये इस बात को बहुत महसूस करते हैं। अतः मैं आशा करता हूँ कि यह सदन मेरे इस संशोधन में मेरा समर्थन करेगा।
श्री सिधवाः मैं जानना चाहता हूँ कि क्या यह भारत सरकार का प्रकाशन है?
डॉ. देशमुखः हाँ, डॉ. अम्बेडकर के पास उसकी एक प्रति है।
माननीय अध्यक्षः संशोधन प्रस्तुत किया गयाः
खंड 3 में, प्रस्तावित छठी अनुसूची में, फ्दिल्लीय् शीर्षक के अंतर्गत, अंत में, निम्नलिखित नई प्रविष्टियां जोड़ी जायेंः
फ्40 नाई।
41 धींवर।
श्री सोनावलेः मेरे मित्र डॉ. देशमुख द्वारा प्रस्तुत संशोधन के संदर्भ में, मेरे विचार में ये वे ही जातियां हैं जो समाज में अछूत हैं....