434 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
फ्40 नाई।
41 धींवर।य्
प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ।
सरदार हुकम सिंह (पंजाब)ः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः
खंड 3 में प्रस्तावित छठी अनुसूची में.....
माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः यदि मेरे माननीय मित्र अपने दोनों संशोधनों को इकट्ठा पेश करते हैं तो मैं उन्हें इस शर्त पर स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ कि उन्हें वर्णक्रमानुसार रखा जायेगा। दिल्ली शीर्षक के अंतर्गत उन्होंने संख्या 40 आदि दी हैं और फ्हिमाचल प्रदेशय् के अंतर्गत उन्होंने संख्या 28 आदि ही हैं। इनकी क्रम संख्या पुनः निर्धारित करनी होगी।
सरदार हुकम सिंहः मैं प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूँः
(एक) खंड 3 में, प्रस्तावित छटी अनुसूची में, फ्दिल्लीय् शीर्षक के अंतर्गत, निम्नलिखित नई प्रविष्टियां जोड़ी जायेंः
फ्40 कबीर पंथी।
41 मजहबी।य्
(दो) खंड 3 में, प्रस्तावित छठी अनुसूची में, फ्हिमाचल प्रदेशय् शीर्षक के अंतर्गत, निम्नलिखित नई प्रविष्टियां जोड़ी जायेंः
फ्28 बंजारा
29 बावरिया
30 रामदासिया।य्
श्री सोनावनेः सरदार हुकम सिंह द्वारा प्रस्तुत संशोधनों के संदर्भ में, मैं यह कहना चाहूंगा कि मुझे बड़ी हैरानी है कि सरदार हुकम सिंह ने, जो स्वयं एक पक्के सिख हैं, कुछ सिखों को, वास्तविक सिखों से निकालकर अनुसूचित जातियों में डाल दिया है। शुरू में मुझे यह जानकर बड़ी हैरानी हुई कि सिखों में भी कुछ अनुसचित जातियां हैं और तब मुझे स्पष्ट हो गया कि डॉ. अम्बेडकर ने सिख-धर्म न अपनाकर ठीक ही किया। इसके अतिरिक्त, जब हम यह सुनते हैं कि पेप्सू और पंजाब में सिखों द्वारा अनुसूचित जातियों पर अत्याचार हो रहे हैं और मुझे खेद है कि मेरे माननीय मित्र सरदार हुकम सिंह चाहते हैं कि कुछ समुदाय अनुसूचित जातियों के रूप में रहें, ताकि उन पर अत्याचार होते रहें। अतः मैं उनसे अनुरोध करूंगा कि वे अपने संशोधन वापस ले लें